
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 28 मार्च 2025। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री इन दिनों ब्रिटेन दौरे पर हैं। जहां बुधवार को उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले और पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हिंसा को लेकर लोगों ने सीएम ममता बनर्जी का विरोध किया। इसे भाजपा ने बंगाल के लिए कलंक बताया। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि बंगाली हिंदुओं ने लंदन के केलॉग कॉलेज में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विरोध किया। लोगों ने आरजी कर में महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या, संदेशखली में महिलाओं के खिलाफ अपराध, हिंदुओं के नरसंहार और व्यापक भ्रष्टाचार के लिए उन पर गुस्सा भरे नारे लगाए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ कुछ पोस्टर लगाए गए। यह पश्चिम बंगाल के लिए कलंक हैं। हिंदू बंगाली प्रवासी उन्हें बंगाल की विरासत को नष्ट करने और उन्हें इस तरह की बदनामी में डालने के लिए मुख्यमंत्री के पद से हटाना चाहते हैं।
एक और वीडियो पोस्ट करते हुए अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के भारत के 2060 तक विश्व की पहली अर्थव्यवस्था बनने को लेकर दर्ज कराई असहमति पर तंज कसा। अमित मालवीय ने लिखा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भारत के दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से परेशानी है। यह वाकई शर्मनाक है। वह अपने सांविधानिक पद के लिए अपमान की बात है। विदेशी धरती पर ऐसा व्यवहार कौन कर सकता है?
टीएमसी ने दिया जवाब
तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी को प्रदर्शनकारियों से बात करते दिखाया गया है। इसमें वह कह रही हैं कि आप मुझे प्रोत्साहित करते हैं। कृपया मुस्कुराएं कि दीदी हर बार आएंगीं। टीएमसी ने कहा कि ममता बनर्जी हिलती नहीं हैं। वे लड़खड़ाती नहीं है। जितना आप उनको टोकेंगे वे उतना ही भयंकर दहाड़ेंगीं। ममता बनर्जी एक रॉयल बंगाल टाइगर हैं।
भारतीय छात्र संघ यूके ने ली जिम्मेदारी
यूके में भारतीय छात्र संघ ने विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। संघ ने एक्स पर लिखा कि एसएफआई-यूके ने ममता बनर्जी के भाषण के खिलाफ केलॉग कॉलेज ऑक्सफोर्ड में प्रदर्शन किया। हमने उनके झूठ का विरोध किया और उनसे सामाजिक विकास के सबूत मांगे। हमें शांतिपूर्वक अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति देने के बजाय, पुलिस को बुलाया गया। पश्चिम बंगाल के छात्रों और मेहनतकश जनता के समर्थन में, एसएफआई-यूके ने ममता बनर्जी और टीएमसी के भ्रष्ट, अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।