
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 10 मार्च 2026। भाजपा के मीडिया प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से राहुल गांधी पर हमला बोला। मालवीय ने कांग्रेस नेता और उनके नेतृत्व में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित AI समिट को बाधित करने और नग्न प्रदर्शन करने की घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मालवीय ने कहा कि राहुल गांधी बड़े गर्व से कह रहे हैं कि “कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने” जबकि असल में इस प्रदर्शन ने पूरी दुनिया के सामने भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने लिखा जब दुनिया भर के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और इनोवेटर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर चर्चा कर रहे थे, तब कांग्रेस पार्टी को लगा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का सबसे अच्छा तरीका अराजकता और अशोभनीय प्रदर्शन है।
कांग्रेस का व्यवहार नेहरू के आदर्शों के बिल्कुल विपरीत
विडंबना यह है कि जिस जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस अपना वैचारिक स्तंभ मानती है, उन्होंने कभी राष्ट्रीय चरित्र और निष्ठा को लेकर बिल्कुल अलग दृष्टिकोण रखा था। 1950 के दशक में, जब महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय के निधन के बाद इंदौर की गद्दी के उत्तराधिकार का सवाल उठा, तब यह मुद्दा सामने आया कि क्या उनकी अमेरिकी पत्नी से जन्मे बेटे रिचर्ड होलकर को होलकर वंश की विरासत मिलनी चाहिए। उस समय की सरकार, जिसमें राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभभाई पटेल भी शामिल थे, के साथ विचार-विमर्श के बाद नेहरू ने स्पष्ट मत रखा, उत्तराधिकारी वही होना चाहिए जो भारतीय माँ से जन्मा हो। यह फैसला एक नए आजाद देश की भावना को दर्शाता था कि वंश, निष्ठा और सभ्यतागत जुड़ाव मायने रखते हैं। आखिरकार सरकार ने महाराजा की भारतीय पत्नी से जन्मी बेटी राजकुमारी उषा देवी राजे साहिब होलकर को होलकर वंश की वैध उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी। बाद में नेहरू ने खुद लिखा कि उनकी मान्यता इसलिए हुई क्योंकि वह जन्म से ही होलकर वंश का हिस्सा थीं।
यह उदाहरण साफ बताता है कि राष्ट्रीय पहचान और निष्ठा कोई अमूर्त विचार नहीं हैं, वे मूल और जुड़ाव से गहराई से जुड़े होते हैं। यहीं से सवाल राहुल गांधी और कांग्रेस से भी उठता है। अगर खुद जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि विदेशी मूल से जन्मा व्यक्ति देश की जिम्मेदारी उठाने के योग्य नहीं माना जा सकता, तो कांग्रेस को नेहरू की ही बात समझने में दिक्कत क्यों है? शायद यही वजह है कि आज वे देश की गरिमा की रक्षा करने के बजाय, दुनिया के सामने भारत को शर्मिंदा करने वाले प्रदर्शनों पर गर्व कर रहे हैं।
क्या है मामला?
गौरतलब है कि नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हाई-प्रोफाइल इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंदर घुसकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी, महंगाई और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने समिट स्थल के भीतर अपनी शर्ट उतारकर इंडिया एआई समिट के डिस्प्ले बोर्ड के सामने नारे लगाए और तस्वीरें खिंचवाईं। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और परिसर से बाहर ले जाया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कोई व्यवधान न हो।
इस समिट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विदेशी प्रतिनिधिमंडल शामिल थे, जिसके चलते घटना ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की। सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने इसे वैश्विक मंच पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बताया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार करार दिया। यूथ कांग्रेस के सोशल मीडिया पोस्ट और विरोध प्रदर्शन के बाद देश में तकनीक, राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।


