कोल ब्लॉक आंवटन में लाखों करोड़ का घोटाला

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उद्योगपतियों को मिली मनपसंद कोल ब्लॉक, कोयला मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक हाथ काले

भागवत जायसवाल, बिलासपुर (छ.ग.)

‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने 21 से 27 नवंबर 2011 के अंक में ‘‘कोल ब्लॉक ऑवंटन में लाखों करोड़ का घोटाला’’  उद्योगपतियों को मिली मनपसंद कोल ब्लॉक, कोयला मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक हाथ काले के शीर्षक से पहला खुलासा किया था। भारत में गणतंत्र की नींव में लगा उद्योगपतियों, राजनेताओं व नौकरशाहों के स्वार्थ का घुन। बेदाग एवं स्वच्छ छवि वाले प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के राज में भ्रष्टाचार और घोटालों के टूटे सारे रिकार्ड। अब दुनिया का सबसे बड़ा कोयला घोटाला का खुलासा ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ ने जनहित व देशहित में किया। बड़े-बड़े उद्योगपतियों को कोल ब्लाॅक बांटने में लाखों करोड़ का घोटाला होने का संदेह था। 1993 से 2004 तक सिर्फ 43 कोल ब्लाॅक बांटे गए,लेकिन 2005 से 2009 तक 242 कोल ब्लाॅक एवं 2010 में केवल 1 ही कोल ब्लॉक बांटा जिसमें 100 सरकारी संस्था के साथ कुछ निजी कंपनियों की भागीदारी थी तथा 186 निजी कंपनियां, कुल 286 कोल ब्लाॅक बांटे गए थे जो लगभग मुफ्त में ही दिए गए थे। इसका कुल आवंटित कोयला भंडार 43548.147 मिलियन टन था। यदि 1000 रुपए प्रति टन के हिसाब से इसके मूल्य का आंकलन करें तो कुल भंडार का मूल्य 43 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक होता है। वर्तमान में कोल इंडिया द्वारा 1000 से  लेकर 4 हजार रुपए प्रति टन की दर से कोयला बेचा जा रहा था, दूसरी ओर एनटीपीसी और कई सरकारी संस्था विदेश से आयातित कोयला को 4 हजार रुपए से लेकर 7 हजार प्रति टन के हिसाब से खरीदने पर मजबूर थे। इस हिसाब से कोल भंडार का मूल्य 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक का होता है।

रिलायंस पावर लिमिटेड ने नियमों को ताक में रखकर  दूसरे पावर प्रोजेक्ट में कोयला उपयोग कर लगभग 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए का फायदा उठाया था। इसी तरह अनेेक उद्योगपति भी कोल ब्लाॅक से बेरोकटोक कोयला उपयोग कर हजारों लाखों करोड़ रुपये का चूना लगा रहे थे और सरकार मूकदर्शक बनी हुई थी? उद्योगपतियों को कोल ब्लाॅक का ऐसा बंदरबांट किया गया जिसमें तत्कालीन कोयला मंत्री शिबू सोरेन और तत्कालीन कोयला एवं खान राज्य मंत्री डाॅ. दसारि नारायण राव के हाथ काले हुए। केंद्रीय कोयला मंत्री शिबू सोरेन को हटाने के बाद डाॅ. मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का भी प्रभार था। जिसके चलते इस घोटाले के छींटे डाॅ. मनमोहन सिंह के दामन में भी पड़ सकते हैं। क्या वर्तमान कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भी इसके छींटे से बच पाएंगे? 2 जी स्पेक्ट्रम से 25 गुना अधिक का कोयला घोटाला का सनसनीखेज खुलासा छत्तीसगढ़ रिपोर्टर” ने 9 पृष्ठो में किया। इस खुलासे ने देश को सन्न कर दिया, जिससे बड़े-बड़े  उद्योगपति, अधिकारियों एवं राजनेताओं में भारी हड़कंप मच गया और यह खबर आग की तरह पूरे देश में फैल गई। इस खबर को देश के विभिन्न पार्टियों के नेताओं एवं सांसदों ने गंभीरता से लिया और “छत्तीसगढ़ रिपोर्टर” के प्रति को संलग्न कर प्रधानमंत्री, कोयला मंत्री,सीवीसी,सीएजी एवं सीबीआई को पत्र लिखकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। इधर  “छत्तीसगढ़ रिपोर्टर” का खुलासा लगातार जारी था।

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43 लाख करोड़ के कोयला घोटाले की आग बुझाने में लगी सरकार और उद्योगपति

शेयर करे”छत्तीसगढ़ रिपोर्टर” के दूसरे खुलासे से राजनेताओं, उद्योगपतियों व कोलमाफियों में मचा हड़कंप भागवत जायसवाल, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने 23 से 29 अप्रैल 2012 के अंक में ‘‘43 लाख करोड़ के कोयला घोटाले की आग बुझाने में लगी सरकार और उद्योगपति’’ ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ के खुलासे से राजनेताओें , […]

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