43 लाख करोड़ के कोयला घोटाले की आग बुझाने में लगी सरकार और उद्योगपति

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”छत्तीसगढ़ रिपोर्टर” के दूसरे खुलासे से राजनेताओं, उद्योगपतियों व कोलमाफियों में मचा हड़कंप

भागवत जायसवाल, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने 23 से 29 अप्रैल 2012 के अंक में ‘‘43 लाख करोड़ के कोयला घोटाले की आग बुझाने में लगी सरकार और उद्योगपति’’ ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ के खुलासे से राजनेताओें , उद्योगपतियों में मचा हड़कंप  के शीर्षक से दूसरा बड़ा खुलासा किया था। जिसमें  कोल ब्लाॅक आवंटन में हुए 43 लाख करोड़ से भी अधिक के घोटाले की आग की लपटें यूपीए की सरकार और कुछ बड़े उद्योगपतियों को जला न दे, इस डर से इसे बुझाने में लगी थी सरकार। आनन-फानन में कोल ब्लाॅक आवंटन की युद्ध स्तर पर जांच शुरू कर दी थी। जिसमें कुछ निजी कंपनियों के कोल ब्लाॅक को निरस्त कर दिया तथा निरस्त कोल ब्लाॅक को सरकारी संस्था एनटीपीसी को पुन:आवंटन किया । मालूम हो कि राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ ने देशहित व जनहित  में दुनिया का सबसे बड़ा कोयला घोटाले का सनसनीखेज खुलासा  21 से 27 नवम्बर 2011 के अंक में कोल ब्लाॅक आवंटन में लाखों करोड़ का घोटाला’ के शीर्षक से किया था। इस खबर के प्रकाशन से राजनेताओं, उद्योगपतियों तथा कोल माफियाओं में भारी हडक़ंप मचा। यह खबर आग की तरह पूरे देश में फैल गई ,यह विशेष खोजी रिपोर्ट 9 पृष्ठों में थी, जिसमें बताया गया कि काले हीरे के खजाने को कैसे लूटाया और 1993 से 2010 तक 286 आवंटित 100 सरकारी संस्थान एवं 186 निजी कंपनियों को दी गई जिसमे, निरस्त 24 कोल ब्लॉकों सहित कुल 208 कोल ब्लॉकों का नाम तथा कोल भण्डार की सूची के साथ ही अनेक दस्तावेज भी प्रकाशित किए थे। इस खबर को देश के विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने गंभीरता से लिया तथा सीएजी ने भी अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में करीब 11 लाख करोड़ का घोटाला होने का संकेत दिया था, यह राशि और बढ़ने की उम्मीद थी। इससे ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ की खबर की सत्यता पर मुहर लग जाती है। इस मामले को लेकर लोकसभा तथा राज्य सभा में भी भारी हंगामा हुआ और प्रधानमंत्री से कोयला घोटाले पर स्पष्टीकरण की मांग की गई। हंगामें के चलते संसद की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी। पुन: छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ ने 23 से 29 अप्रैल 2012 के अंक में ‘43 लाख करोड़ के कोयला घोटाले की आग बुझाने में लगी सरकार और उद्योगपति’ के शीर्षक से 8 पृष्ठों की विशेष खोजी रिपोर्ट में दूसरा बड़ा खुलासा किया था । जिसमें अनेक सांसदों ने कार्रवाई के लिए पत्र लिखे। सांसद गोविन्द राव आदिक द्वाराछत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ में 21 से 27 नवम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित खबर को लेकर  14 दिसम्बर 2011 को  कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को लिखे गए पत्र पर कोयला मंत्री श्री जायसवाल ने 4 पन्नों का कंडिकावार 1 से 12 तक दिए गए जवाबी पत्र में पत्र क्र. डी.ओ.नं. 38036/01/2012-सीए-1 दिनांक 9 फरवरी 2012 को जो जानकारी दी थी वह पत्र ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ के पास उपलब्ध है। उसके अनुसार सरकारी एवं निजी कंपनियों को कुल 195 कोल ब्लॉक (44.23 बिलियन टन) कोयला का भंडार आवंटित किया गया था। जिसमें से 28 कोल ब्लॉकों में उत्पादन हो रहा था। उन्होंने कंडिका 9 में स्पष्ट किया है कि कोल माइंस (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम 1973 के अंतर्गत पात्र पब्लिक एवं निजी कंपनियों को अब तक 218 कोल ब्लॉकों का आवंटन किया गया था जिसका कोयला भंडार 50 बिलियन टन था, जिसमें से 25 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया गया। इसके अलावा श्रीप्रकाश् जायसवाल ने कोयला आवंटन के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा सांसदों एवं यूनियन नेताओं और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक आदि के द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन के विरोध में लिखे गए पत्र तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ सीएजी ने भी अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में करीब 11 लाख करोड़  का कोयला घोटाला होने का संकेत दिया था, आदि के संबंध में  छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ ने 8 पृष्ठो में दूसरा बड़ा खुलासा किया । इस खुलासे के बाद राजनेताओं, अधिकारियों , उद्योगपतियों तथा कोल माफियाओं में भारी हडक़ंप मचा और कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले के मामले को लेकर पुन:  लोकसभा एवं राज्यसभा में  हंगामा हुआ, जिसके चलते संसद की कार्रवाई कई दिनों तक स्थगित रही, तब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने आनन-फानन में अपनी साख बचाने के लिए सीबीआई  जांच के आदेश दिए तथा कोयला मंत्रालय ने भी बड़े पैमाने पर जांच शुरु की। इधर ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ ने खुलासा लगातार जारी रखा था ।

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