धान खरीदी को लेकर सरकार लापरवाह – भूपेश बघेल

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सोसायटी कर्मचारियों की मांग जायज सरकार उनका समाधान करे

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

रायपुर 13 नवंबर 2025।राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि धान खरीदी की तिथि नजदीक आ गई है। सरकार की धरातल पर कोई तैयारी नहीं दिख रही है। सोसायटी के 15,000 कर्मचारी प्रबंधक, कम्प्यूटर ऑपरेटर सभी हड़ताल पर है। इनके हड़ताल को एक हफ्ते होने जा रहा, सरकार द्वारा हड़ताल समाप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। इन कर्मचारियों की हड़ताल से खरीदी प्रभावित होगी। सोसायटी कर्मचारियों की मांग जायज है, कांग्रेस उनका समर्थन करती है। सोसायटी कर्मचारियों के माध्यम से ही धान खरीदी होगी, सरकार को उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि धान खरीदी समय पर शुरू हो सके।
राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन की दिक्कतों के कारण पूरे किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है, खरीदी की तिथि तीन दिन बची है। अभी भी लगभग 7 लाख से अधिक किसान पंजीयन के लिए परेशान है। जिनका ऑनलाइन पंजीयन नहीं हुआ है, उनका सोसायटी में पंजीयन किया जाए, कोई भी किसान धान बेचने से वंचित न होने पाए यह सुनिश्चित किया जाए।
राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 25 लाख किसानों से धान खरीदेंगे। पिछले वर्ष लगभग 27 लाख किसानों ने धान बेचा था। यदि 10 प्रतिशत की भी वृद्धि होती है तो इस वर्ष लगभग 29 लाख 70 हजार किसानों का पंजीयन होना चाहिए। सरकार के लक्ष्य से ही समझ आ रहा है कि सरकार नहीं चाहती कि पूरे किसान धान बेचे इसीलिए पंजीयन में परेशानी पैदा की गई है।
राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट पर सरकार का सूचना तंत्र पूरी तरह विफल रहा। गृह मंत्री चुनावी व्यस्तता में उलझे, जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। आज तक देश ने इतना कमजोर गृह मंत्री नहीं देखा। मणिपुर दो साल तक जलता रहा, फिर भी केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी रही। पुलवामा हमले में आया आरडीएक्स आज तक पता नहीं चल पाया कि आया कहां से था? अब फरीदाबाद में 190 किलो विस्फोटक मिलने के बाद भी सुरक्षा पर सवाल उठा है? विस्फोटक पकड़े जाने के 24 घंटे के भीतर ही दिल्ली में ब्लास्ट केंद्र की नाकामी उजागर करता है। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र सरकार के अधीन, फिर भी सुरक्षा चूक पर कोई जवाब नहीं दे रहे। देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है। एजेंसियां विपक्षी नेताओं की जासूसी में लगी हैं, जनता की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।
राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर की स्थिति पर भी चिंता जताई। बस्तर में नक्सली बाहर आ रहे हैं, लेकिन बाहरी लोग अंदर घुस रहे हैं। जमीनों पर कब्जा हो रहा है, सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उद्देश्य साफ है कि “नक्सल खत्म कर जमीन और खनिजों पर कब्जा जमाना” सरकार के चहेते उद्योगपतियों का लक्ष्य बन गया है। अबूझमाड़, बीजापुर तक में भू-माफिया जमीन खरीद रहे है।

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