अरबों के कोयला घोटाले में बड़े-बड़ों से जुड़े हैं तार

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर के खुलासे से मचा हड़कंप, सीबीआई का छापा

भागवत जायसवाल, बिलासपुर (छ.ग.)

‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने 26 दिसंबर 2005 से 1 जनवरी 2006 के अंक में ‘अरबों के कोयला घोटाले में बड़े-बड़ों से जुड़े हैं तार’ छत्तीसगढ़ रिपोर्टर के खुलासे से मचा हड़कंप, सीबीआई का छापा के शीर्षक से नौवां बड़ा खुलासा किया था। जिसमें सीबीआई भी बड़े पैमाने पर जांच कर रही थी और डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने इस घोटाले को गंभीरता से लेते हुए 5 सांसदों की जांच कमेटी गठित की। इन सांसदों द्वारा एसईसीएल के गेवरा और कुसमुंडा, दीपका परियोजनाओं का निरीक्षण एवं जांच के दौरान  दीपका परियोजना में कोलमाफियाओं के आदमियों ने सांसदों की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर भारी हंगामा किया तथा एक सांसद को झूमाझटकी से चोट भी आई। मौजूदा सुरक्षाकर्मी और पुलिस द्वारा बीच बचाव कर आनन-फानन में सांसदों की गाड़ियों को बाहर निकाला गया।  यहां हो रही अरबों की कोयला चोरी एवं घोटाले की जांच- रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी गई। उन रिपोर्टों को चर्चित कोलमाफिया के द्वारा फिर दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन कामयाब नहीं हुए। अंतत: सांसदों की समिति एवं सीबीआई की जांच रिपोर्ट के बाद केन्द्र सरकार ने कोल माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों पर अंकुश लगाने के लिए एशिया के सबसे बड़ी खुली कोयला खदान गेवरा, दीपका में कोयला चोरी रोकने के लिए सी.आई.एस.एफ की कई बटालियन सुरक्षा में लगाई।  यह भी बताना आवश्यक है कि  ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने 19 से 24 अप्रैल 2004 के अंक में ‘‘एस.ई.सी.एल में सालाना 10 अरब का कोयला घोटाला, सिलसिला वर्षों से जारी ’’ के शीर्षक से प्रथम खुलासा किया था। उसके बाद घोटाले को दबाने के लिए हर हथकंडा अपनाया गया तथा ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ के प्रधान संपादक भागवत जायसवाल को हर तरह से  परेशान करने का भरपूर प्रयास किया गया। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से लेकर विभिन्न न्यायालयों में आईपीसी की धारा 499 एवं 500 के तहत मानहानि का मामला भी दायर किया गया, फिर भी ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ के प्रधान संपादक भागवत जायसवाल निर्भीक, निष्पक्ष पत्रकारिता का दायित्व निभाते हुए अपने सिद्धांत में अडिग रहे और खुलासा लगातार जारी रखा। जिससे इस बड़े घोटाले पर लगातार कार्यवाही भी हुई, जिसके बाद एक-एक कर सभी न्यायालयों के फैसले ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ के प्रधान संपादक भागवत जायसवाल के पक्ष में आते गए और ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ के सभी खुलासों की सत्यता पर मुहर लग गई। ‘‘ सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं ’’ आखिर में सत्य की  ही जीत होती है। मानहानि के इस मामले में ‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’ के क्षेत्रीय संवाददाता, ब्यूरो चीफ, अधिवक्ता और शुभ चिंतक बिलकुल साथ खड़े और डंटे रहे। काले हीरे के घोटालेबाजों को बड़ा गुरूर था कि अरबपति बन जाने के बाद अब कोई भी उनका बाल बांका नहीं कर पायेगा, उनकी मुट्‌ठी में संसार है लेकिन उनका संसार ख्रतरे में पड़ गया, क्योंकि ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने एसईसीएल में गहरी जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने का जोखिम भरा कारनामा देशहित में किया था । जहां सालाना 10 अरब का कोयला घोटाला हो रहा था और यह सिलसिला 15 वर्षों से जारी था, उस पर आखिरकार रोक लगी। यह देश का पहला मामला है जो ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ के इन खुलासों के कारण संभव हुआ था। 

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