खरबों की खनिज संपदा को टाटा व एस्सार के हवाले में बड़े खेल

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टाटा को 500 और एस्सार को 320 मिलियन टन लौह अयस्क देने का एम.ओ.यू

भागवत जायसवाल, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने 7 से 13 अगस्त 2006 के अंक में ‘‘खरबों की खनिज संपदा को टाटा व एस्सार के हवाले में बड़ा खेल!’’ टाटा को 500 और एस्सार को 320 मिलियन टन लौह अयस्क देने का एम.ओ.यू. के शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था । बस्तर में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड व एस्सार लिमिटेड को स्टील प्लांट लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ क्रमश: 4 जून 2005 एवं 5 जुलाई 2005 को छत्तीसगढ़ सरकार ने एक समझौता (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर करके छत्तीसगढ़ की खरबों रुपए की खनिज संपदा को कौडिय़ों के मोल बेचने पर आमादा थे। सरकार, टाटा का 500 मिलियन टन एवं एस्सार लिमिटेड 320 मिलियन टन लौह अयस्क का भण्डार नाम मात्र की लीज पर सौंपने जा रहा था। इस समय प्रदेश में उपलब्ध लौह अयस्क भण्डार में से सरकार ने टाटा को बैलाडीला – 1 से 140 मिलियन टन, रावघाट से 250 मिलियन टन शेष एन.एम.डी.सी. से दिलाए जाने को कहा था। इसी प्रकार एस्सार को बैलाडीला- 4 से 124 मिलियन टन बैलाडीला 3,6,7,8 एवं 9 से 95 मिलियन टन दिलाने का वादा किया था। यदि भण्डारण, टाटा एवं एस्सार के हवाले कर दिया गया तो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भिलाई स्टील प्लांट के लिए कहां से अयस्क आएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं था। एक अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 6.6 अरब टन लौह अयस्क भण्डार शेष है। जबकि भारतीय एजेंसी के अनुसार 10 अरब टन शेष है। जो अगले 35 से 50 सालों में पूरी तरह खत्म हो जाएगा। जिसमें उच्च क्वालिटी का सिर्फ 2 अरब टन हैं। हमारे देश में खासकर छत्तीसगढ़ के बैलाडीला में उच्च कोटि के लौह अयस्क हैं। सरकार छत्तीसगढ़ की इस खनिज संपदा को टाटा कंपनी एवं एस्सार कंपनी को देने जा रही थी , जिसका आज के दिनों में अंतर्राष्ट्रीय मूल्य करीबन 4 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा होता है। सरकार ने टाटा व एस्सार को प्लांट लगाने के लिए ऐसी शर्त स्वीकार कर ली थी, जिससे आने वाले वर्ष में भयानक स्थिति निर्मित हो सकती थी। ‘‘छत्तीसगढ़ रिपोर्टर’’ ने, खोजबीन में मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य एवं देशहित में खुलासा किया था। इस खुलासे के बाद राजनेताओं एवं उद्योगपितयों में हड़कंप मच गया और इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया । इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने टाटा को 500 और एस्सार को 320 मिलियन टन बैलाडीला का लौह अयस्क भंडार देने के लिए 50 साल का एम.ओ.यू.  किया था उसे निरस्त कर दिया।

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