पर्यटकों के लिए है खास, हाथियों वाला गेट

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
इंदौर, 14 अक्टूबर 2026। इंदौर में शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में अलग ही रौनक है। हजारों भक्त रोज दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। शहर का अन्नपूर्णा मंदिर धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है। संगमरमर से बने इस मंदिर का प्रवेश द्वार दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली में निर्मित है। इंदौर आने वाले पर्यटकों की सूची में अन्नपूर्णा मंदिर भी शामिल रहता है। करीब 67 साल पहले जब इस मंदिर का निर्माण हुआ था, तब इस इलाके में खेती होती थी और आसपास जंगल हुआ करते थे।
उस समय आसपास गिने-चुने मकान ही थे, लेकिन आज पूरे इलाके की पहचान अन्नपूर्णा मंदिर से है। मंदिर के संस्थापक प्रभानंद गिरी महाराज यहां कुटिया बनाकर रहते थे और पेड़ के नीचे बैठकर पूजा किया करते थे।
उन्होंने अन्नपूर्णा मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया, जिसके लिए उन्हें जनसहयोग भी मिलने लगा। इसके बाद दो एकड़ जमीन पर मंदिर परिसर का निर्माण शुरू हुआ। 21 फरवरी 1959 को मंदिर में मां अन्नपूर्णा सहित तीन देवियों की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद वर्ष 1975 में दक्षिण भारत के मीनाक्षी मंदिर की शैली में मंदिर के प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया।धीरे-धीरे इस मंदिर की ख्याती फैलने लगी और आसपास बसाहट भी बढ़ गई।नासिक में भी एक मंदिर ट्रस्ट ने बनाया है।
चार हाथियों पर आधारित यह भव्य प्रवेश द्वार आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। द्वार पर अनेक मूर्तियां उकेरी गई हैं। चार साल पहले करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष अनुष्ठान हो रहे हैं। जिन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वे माता को प्रसाद अर्पित करते हैं।


