तीनों सेनाओं को मजबूत बनाने पर काम कर रही मोदी सरकार, बिपिन रावत का ड्रीम प्रोजेक्ट था थिएटर कमांड

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 16 मार्च 203। सरकार ने लोकसभा में बुधवार को अंतर सेवा संगठन (कमान, नियंत्रण एवं अनुशासन) विधेयक, पेश किया। इस विधेयक में कमांडर इन चीफ या ऑफिसर इन कमांड को वायुसेना अधिनियम 1950, सेना अधिनियम 1950 और नौसेना अधिनियम 1957 के अधीन कार्यरत सेवा कार्मिकों के संदर्भ में अनुशासन बनाए रखने और कर्तव्यों के उपयुक्त निर्वहन सुनिश्चित करने के लिए सशक्त करने का प्रावधान किया गया है।

लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने शोर-शराबे के बीच उक्त विधेयक पेश किया। यहां बता दें कि थिएटर कमांड देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल दिवंगत बिपिन रावत का ड्रीम प्रोजेक्ट था। रावत इस पर काफी गहराई से काम कर रहे थे।

क्या है थिएटर कमांड

आसान शब्दों में बताए तो थिएटर कमांड देश की तीनों सेनाओं और सैन्य बलों को एकसाथ लाने का काम करेगा। तीनों सेनाओं का तालमेल खासतौर पर इमरजेंसी के समय काम आएगा। थिएटर कमांड देश की भौगोलिक और रणनीतिक क्षेत्र को देखते हुए बनाया जाता है ताकि एक ही तरह के क्षेत्र में जंग के हालात संभाले जा सकें, जैसे- हिमालय का क्षेत्र, गुजरात का कच्छ या फिर राजस्थान का रेगिस्तान।

इस विधेयक का उद्देश्य

  • विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया कि इसके तहत अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार को अंतर सेवा संगठन का गठन करने के लिए सशक्त किया जाएगा जो ऐसी इकाइयों या सेवा कार्मिकों से मिलकर बनेगा जिन पर वायुसेना अधिनियम 1950, सेना अधिनियम 1950 और नौसेना अधिनियम 1957 के उपबंध लागू होते हैं। इसके तहत संयुक्त सेवा कमान सम्मिलित हो सकेगी जिसे कमांडर इन चीफ या कमांड ऑफिसर की कमान के अधीन रखा जा सकेगा।
  •  कमांडर इन चीफ या कमांड ऑफिसर या केंद्र सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किसी अन्य अधिकारी को संबंधित अंतर सेवा संगठनों में सेवा कर रहे या संबद्ध कार्मिकों के संबंध में अनुशासन बनाए रखने और उनके कर्तव्यों के समुचित निर्वहन के लिए सभी अनुशासनिक और प्रशासनिक शक्तियों से सम्पन्न बनाना है।
  • इसमें अंतर सेवा संगठन के कमांडन इन चीफ या कमांड ऑफिसर के संबंध में यह समझा जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित विधान के उपबंधों के अधीन नियुक्त किया गया है जिसे प्रस्तावित विधान के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्व नियुक्त किया गया था और जो उस रूप में कार्य कर रहे थे। 
  • इसके माध्यम से मामलों के त्वरित निपटान, समय एवं जनधन की बचत और सशस्त्र बल के कार्मिकों के बीच बेहतर एकीकरण तथा एकता की भावना को मजबूत बनाने आदि पर ध्यान देने की बात कही गई है। इस समय वायुसेना, थल सेना और नौसेना में सेवा कर रहे कार्मिक वायु सेना अधिनियम 1950, सेना अधिनियम 1950 और नौसेना अधिनियम 1957 (सेवा अधिनियम) द्वारा शासित होते हैं।
  • केवल संबंधित सेवाओं के अधिकारी ही संबंधित सेवा अधिनियमों के अधीन सेवा कार्मिक पर अनुशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त हैं। इसका अंडमान और निकोबार कमान या राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय जैसे संयुक्त प्रशिक्षण स्थापन कमान, नियंत्रण और अनुशासन पर सीधा प्रभाव होता है क्योंकि ऐसे अंतर सेवा संगठनों का कमांडर इन चीफ या कमांड ऑफिसर अन्य सेवाओं से संबंध रखे वाले कार्मिक पर अनुशासनिक या प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त नहीं होता है। 
  • इसके परिणामस्वरूप, अंतर सेवा संगठनों में सेवा कर रहे कार्मिकों को किसी अनुशासनिक या प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उनकी मूल सेवा इकाइयों में वापस भेजने की जरूरत होती है। इसमें समय भी लगता है और वित्तीय पहलू भी होते हैं। ऐसे में अंतर सेवा संगठनों के कमांडर इन चीफ या कमांड ऑफिसर को उनकी कमान के अधीन सेवा कर रहे या उससे संबद्ध सेवा कार्मिक पर अनुशासन बनाए रखने और उनके कर्तव्यों के निर्वहन के लिए विशिष्ट सेवा शर्तों में परिवर्तन या सेवा अधिनियमों में संशोधन किए बिना नियंत्रण का उपयोग करने के लिए सशक्त बनाने की जरूरत उत्पन्न हुई।

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