‘बदलते परिदृश्य के बीच विदेश नीति में बदलाव की जरूरत’, जयशंकर बोले- आगामी पीढ़ी के लिए योजना बना रहा भारत

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 16 दिसंबर 2024। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि बदलते परिदृश्य को देखते हुए ‘विकसित भारत के लिए एक विदेश नीति’ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम विदेश नीति में बदलाव की बात करते हैं, तो इसे नेहरू के बाद की राजनीति पर हमला नहीं समझना चाहिए। इंडियाज वर्ल्ड मैगजीन के लॉन्च के मौके पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत अब दुनिया में एक ‘परिणाम देने वाला खिलाड़ी’ बनता जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ने वाली है और हम एक ‘गतिशीलता’ का अनुभव करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की विदेश नीति के लिए मेरा मानना है कि सोच बड़ी, लंबी और स्मार्ट होनी चाहिए। 

कार्यक्रम में, उन्होंने विदेश नीति के विशेषज्ञ सी राजा मोहन के साथ एक छोटी सी चर्चा भी की, जो उस पत्रिका के संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं। अपने संबोधन में, जयशंकर ने कहा कि भारत आने वाली पीढ़ी के लिए योजनाएं बना रहा है और साथ ही अपने प्रभाव को धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हम दुनिया को ज्यादा ध्यान से और समझदारी से देखें, तो हम एक बहु-पीढ़ी वाली विदेश नीति बना सकते हैं, जो कि सभी जोखिमों और चिंताओं से बाहर होगी।विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत अब एक ऐसी विदेश नीति की ओर बढ़ रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि पहले हम एक रक्षात्मक विदेश नीति अपनाते थे, लेकिन अब वह समय खत्म हो चुका है। 

भारत में विदेश नीति में बदलाव की जरूरत के चार बड़े कारण
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत में विदेश नीति में बदलाव की जरूरत के चार बड़े कारण हैं। पहला कारण यह है कि कई वर्षों तक हमारे पास ‘नेहरू विकास मॉडल’ था, और उसी के आधार पर हमारी विदेश नीति भी तय की गई थी। उन्होंने कहा कि अब हम उस विदेश नीति को सुधारना चाहते हैं, जैसे घर में विकास मॉडल को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। 

भारत में मोल्दोवा का दूतावास खुलने से हमारी साझेदारी आगे बढ़ेगी: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली में यूरोपीय देश मोल्दोवा का दूतावास खुलने से दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू होगा। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, खासकर महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। जयशंकर ने दूतावास के उद्घाटन पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि जल्द ही हम मोल्दोवा में भी भारतीय दूतावास देखेंगे।’ उन्होंने इसे भारत और मोल्दोवा के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने कहा, ‘जब भी कोई नया दूतावास खुलता है, तो यह दिखाता है कि हमने कुछ सही किया है।’ उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विदेशों में भारत के विभिन्न नए दूतावासों या वाणिज्य दूतावासों का खुलना ‘दुनिया के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव का प्रतिबिंब है।’ इस विशेष स्थिति में, यह दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती को भी दर्शाता है। जयशंकर ने यह भी कहा, ‘यह कदम 1992 में हमारे राजनयिक संबंधों की शुरुआत के बाद से हमारे देशों के बीच साझा प्रतिबद्धताओं को दिखाता है।

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