मध्य प्रदेश: कांग्रेस से आए नेताओं ने बढ़ा दी है भाजपा की चिंता, मंथन में जुटी पार्टी

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

भोपाल 10 मई 2022। मध्य प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में नजदीकी अंतर से कांग्रेस से पिछड़ने के कारण सत्ता गंवाने वाली भाजपा अब अगले विधानसभा चुनावों के लिए पूरी सतर्कता बरत रही है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रदेश भाजपा के मंथन में सत्ता और संगठन के बीच संतुलन और संवाद बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही जिलों के प्रभारी मंत्रियों से व्यापक फीडबैक भी हासिल किया जा रहा है। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि कोई भी अपना टिकट पक्का मान कर न चले, प्रदर्शन (परफॉर्मेंस) के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन होगा।

मध्य प्रदेश में अगले साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं।  राज्य में अभी भाजपा की सरकार है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। बाद में कांग्रेस में विभाजन के बाद वह फिर से अपनी सरकार बनाने में सफल रही थी। ऐसे में भाजपा अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों के ध्यान में रखते हुए कर रही है। केंद्रीय नेतृत्व के साथ पिछले दिनों हुई प्रदेश के प्रमुख नेताओं की बैठक के बाद अब राज्य के प्रमुख नेता मंथन कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के प्रभारी मुरलीधर राव संगठन से पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सत्ता और संगठन में दूरी दिख रही है। उनकी कोशिश है कि सत्ता और संगठन में समय रहते बेहतर संतुलन और संवाद कायम हो सके, ताकि चुनावी रणनीति पर प्रभावी ढंग से अमल किया जा सके।

विधायकों के प्रदर्शन में कमी का फीडबैक
मध्य प्रदेश में सवा साल का समयांतराल छोड़कर बीते दो दशक से भाजपा की सरकार है। ऐसे में सत्ता विरोधी माहौल भी होगा और विधायकों और मंत्रियों को लेकर असंतोष भी हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने अभी तक जो फीडबैक हासिल किया है, उसमें कई स्तरों पर विधायकों के परफॉर्मेंस (प्रदर्शन) में कमी उभरकर सामने आई है। ऐसे में पार्टी ने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना शुरू कर दिया है कि अगले चुनाव के लिए टिकटों का फैसला वरिष्ठता और अनुभव के बजाय जमीनी आकलन पर होगा। केंद्रीय प्रभारी मुरलीधर राव ने कार्यकर्ताओं के बीच कार्यक्रम में यह साफ करना शुरू कर दिया है कि जो जमीन पर जितना काम करेगा, उसको आगे बढ़ाया जाएगा। 

कांग्रेस से आए नेता पार्टी की बड़ी चिंता
पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की 20 मई को जयपुर में होने वाली बैठक में राज्य का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाएगा। इसमें संगठन महामंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पूरी रिपोर्ट रखेंगे। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में भाजपा की चिंता का एक कारण कांग्रेस से पार्टी में आए नेता भी हैं। इसके चलते कई क्षेत्रों में पार्टी के अपने कैडर में असंतोष अभी तक दूर नहीं हो पाया है। चूंकि, इनमें अधिकांश विधायक हैं इसलिए भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से उनकी जगह मौका मिलेगा इसे लेकर भी संदेह है। इसमें ग्वालियर, चंबल और मालवा क्षेत्र के कुछ जिले शामिल हैं। ऐसे में वहां पर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और कांग्रेस से आए नेताओं के बीच सामंजस्य बिठाना काफी महत्वपूर्ण व बड़ी चुनौती है।

कांग्रेस को कमजोर नहीं मान रही भाजपा
पार्टी के एक नेता ने कहा है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस की टूट के बाद भी भाजपा कांग्रेस को कमजोर नहीं मान रही है। क्योंकि कागजों पर जो बड़ा अंतर दिखता है वह जमीन पर भी हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए पार्टी को अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी।

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