बाढ़ राहत की आड़ में लोगों को बना रहे कट्टरपंथी, पाकिस्तानी जिहादी संगठनों की करतूत, आपदा में तलाश रहे अवसर

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

इस्लामाबाद 28 सितंबर 2022। पाकिस्तान के जिहादी संगठनों ने आपदा में अवसर ढूंढ निकाला है। दरअसल पड़ोसी देश इस समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से गुजर रहा है लेकिन वहां मौजूद जिहादी संगठन लोगों को कट्टरपंथी बनाने का एक भी मौका नहीं गंवाना चाहते हैं। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि जिहादी समूह, लश्कर-ए-तैयबा अन्य प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला रहा है। संगठन अपनी जिहादी विचारधारा का प्रसार कर रहा है और तथाकथित बाढ़ राहत प्रयासों के नाम पर पाकिस्तानियों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती कर रहा है। पाकिस्तान में बाढ़ ने कहर बरपाया हुआ है जहां हजारों लोगों की जान चली गई है। देश में पशुधन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ के चलते लगभग 3.3 करोड़ पाकिस्तानी लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते समय पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मानसून को “राक्षस मानसून” कहा था, जिसने 1,200 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।

विभिन्न देशों ने बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान की मदद की है और कई नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों ने भी स्थिति का जायजा लेने के लिए देश का दौरा किया है। हालांकि, आतंकी संगठन स्थिति का फायदा उठाने के अवसर तलाश रहे हैं। दक्षिण एशिया प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आपदा ने जिहादी संगठनों को प्रभावितों की “मदद” करने की भावना से देश भर में वापसी करने का अवसर दिया है। लश्कर ए तैयबा अब पंजाब, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा व सिंध सहित कई प्रांतों में फिर से सक्रिय हो गया है। आतंकियों की टीम ने एक बार फिर वापसी की है। 

दक्षिण एशिया प्रेस की जांच की जांच के बाद यह खुलासा हुआ है। मीडिया आउटलेट की जांच के अनुसार, समूह ने अपना नाम बदल लिया है और अब अल्लाह-उ-अकबर-तहरीक के नाम से काम कर रहा है। इस नाम के तहत, समूह को बाढ़ राहत प्रयासों के नाम पर फंड मिल रहा है। यह समूह पाकिस्तानी सेना और अन्य सरकारी व गैर-सरकारी संगठनों के साथ बचाव और राहत कार्य में सक्रिय रूप से शामिल है। दक्षिण एशिया प्रेस की टीम ने कई तस्वीरें, वीडियो और चश्मदीद गवाह इकट्ठा किए हैं जो आतंकी संगठन की कार्रवाइयों को उजागर करते हैं। 

इनसे यह भी पता चलता है कि आतंकी संगठन के पाकिस्तान में पुनरुत्थान के पीछे आतंकी गतिविधियों से जुड़े कई लोग शामिल हैं। लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद का बेटा हाफिज तल्हा सईद जैसे लोग इन जिहादी संगठनों की मदद कर रहे हैं। हाफिज सईद को हाल ही में आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप में दोषी ठहराया गया था और जेल में डाल दिया गया था। लेकिन यह केवल एक दिखावा था। वह पिछले एक दशक में कई बार गिरफ्तार और रिहा हुआ है। 

अन्य प्रमुख आयोजकों में हाफिज सईद और नदीम अवान के करीबी सहयोगी हाफिज अब्दुर रऊफ का नाम भी सामने आया है। यह जिहादी समूह से जुड़ा है। जांच में राहत और बचाव कार्यों में सबसे आगे रहने वाले इन व्यक्तियों और लश्कर-ए-तैयबा के बीच संबंध का पता चला है। वे सभी नाम जो पहले लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन से जुड़े रहे हैं और बार-बार अंडरग्राउंड हुए हैं वे फिर से नई पहचान के साथ सामने आए हैं।

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