देश के जवानों में भी बढ़ता खतरा

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली, 09 अक्टूबर 2026। राजधानी दिल्ली-एनसीआर से लेकर तमिलनाडु और गुजरात तक, देश में इन दिनों डेंगू का खतरनाक प्रकोप देखा जा रहा है। अगस्त से लेकर अक्तूबर तक हर साल देश में मच्छर जनित रोगों का खतरा और इसके कारण अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। अक्तूबर में अभी 8 दिन ही बीते हैं, और कई स्थानों से आ रही खबरें लोगों को डरा रही हैं।
तमिलनाडु और गुजरात से सामने आई ताजा खबरें स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ाती जा रही हैं। वहीं दिल्ली-एनसीआर में अकेले अक्तूबर के पहले हफ्ते में ही करीब 100 मामले रिपोर्ट किए गए हैं। तमिलनाडु में इस साल 7 अक्तूबर तक डेंगू के 21 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 10 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड के लिए पहुंचे 50 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को डेंगू से संक्रमित पाया गया है, इनमें से 43 अस्पताल में भर्ती हैं। पड़ोसी देश बांग्लादेश की स्थिति और भी गंभीर है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश में इस साल अब तक 280 से ज्यादा लोगों की डेंगू से जान जा चुकी है।
पहले दिल्ली का हाल जान लीजिए
दिल्ली में मॉनसून के बाद डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्तूबर के पहले हफ्ते में ही राजधानी में डेंगू के 98 नए मामले सामने आए, जिससे इस साल अब तक कुल मामलों की संख्या बढ़कर 695 हो गई है।
- न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में दिल्ली में डेंगू के 286 और मलेरिया के 124 मामले दर्ज किए गए थे। ये इस साल किसी भी महीने में दोनों बीमारियों के सबसे ज्यादा आंकड़े हैं।
- वेक्टर-जनित बीमारी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में अब तक अक्तूबर में डेंगू के 98 और मलेरिया के 23 मामले दर्ज किए गए हैं।
- इस साल मलेरिया के कुल मामलों की संख्या 266 हो गई है।
क्या है बढ़ते मामलों की वजह?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसून के बाद के दिनों में जगह-जगह जलजमाव की स्थिति देखी जाती रही है। ये मच्छरों को तेजी से बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल देता है। डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ रुके हुए पानी में अंडे देते हैं, यही कारण है कि जलजमाव की स्थिति मच्छरों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
सितंबर के आखिर और अक्तूबर के दौरान, मौसम बदलने का दौर होता है, जिसमें तापमान 28°C से 32°C के बीच रहता है और नमी का स्तर औसतन 60% से 70% होता है। मौसम की यह खास स्थिति भी मच्छरों के जीवन-चक्र को बढ़ाती है।
तमिलनाडु: चेन्नई में कैसे हैं हालात?
तमिलनाडु के कई शहरों में बीते कुछ हफ्तों से डेंगू के हालात गंभीर देखे गए हैं।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने गुरुवार को बताया कि चेन्नई में डेंगू के मामले फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, उन्होंने लोगों से अपील की है कि खतरों को देखते हुए अपने घरों और आसपास मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए सभी जरूरी उपाय करें। राज्य में इस साल अब तक डेंगू से 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
- स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्यभर में बुखार से पीड़ित लोगों की जांच के लिए हर दिन औसतन 1,000 चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं।
- इन शिविरों में बुखार के मरीजों की जांच की जाती है, ताकि डेंगू जैसी बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सके।
- राज्य में 1 जनवरी से 7 अक्तूबर तक डेंगू के कुल 21,655 मामले सामने आए हैं। इसी अवधि में 10 लोगों की मौत हुई है।
- चेन्नई में डेंगू के मामले धीरे-धीरे कम होने के बाद अब स्थिर हो गए हैं। हालांकि, मानसून के बाद डेंगू के मामले फिर बढ़ने की आशंका है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
चेन्नई में डेंगू के हॉटस्पॉट यानी ऐसे इलाके जहां संक्रमण के मामले ज्यादा मिलते हैं, उनकी संख्या पहले 590 थी जो अब घटकर 300 रह गई है। हालांकि, तमिलनाडु के अस्पतालों में अभी भी डेंगू के 301 मरीजों का इलाज चल रहा है।
गुजरात: राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में आए 50 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी डेंगू की चपेट में
अहमदाबाद से मिली खबरों के मुताबिक, राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड में हिस्सा लेने के लिए गांधीनगर पहुंचे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 50 से ज्यादा जवान डेंगू से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 43 जवानों को गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इसी बीच, असम के रहने वाले सीआरपीएफ के 29 वर्षीय जवान की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह गांधीनगर सिविल अस्पताल में डेंगू का इलाज करा रहे थे। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक उनकी मौत का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है।
- डेंगू के बढ़ते मामलों के बाद गुजरात के स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में बचाव के उपाय तेज कर दिए हैं।
- राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बढ़ते मामलों की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
- इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मशीनों से मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव, मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के अभियान और निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए गए।


