फैमिली कोर्ट जजों की याचिका खारिज

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सात फैमिली कोर्ट जजों की उस याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया, जिसमें उन्हें हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नति के लिए विचार किए जाने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि समस्या फैमिली कोर्ट के लिए अलग कैडर बनाए जाने से जुड़ी है। पीठ ने कहा कि पहले के फैसलों में इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। अदालत ने कहा कि जब तक परिस्थितियों या कानूनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता, तब तक पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने का आधार नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित हाईकोर्ट और राज्य सरकार से फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति के नियमों में बदलाव की मांग कर सकते हैं। अदालत ने इसे मुख्य रूप से नीतिगत मामला बताया। शीर्ष अदालत के पहले के फैसले के मुताबिक फैमिली कोर्ट के जज सामान्य अर्थ में जज हो सकते हैं, लेकिन वे राज्य की न्यायिक सेवा का हिस्सा नहीं हैं और संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत ‘न्यायिक पद’ धारण करने वाले नहीं माने जाते। इसलिए उन्हें हाईकोर्ट में पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार नहीं है।

फैमिली कोर्ट के जजों ने क्या मांग की थी?
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे फैमिली कोर्ट में न्यायिक कार्य करते हैं और भारत के क्षेत्र में ‘न्यायिक पद’ पर हैं। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत उन्हें हाईकोर्ट के जज पद पर नियुक्ति के लिए विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत ने कहा कि मामला संविधान के अनुच्छेद 217 की व्याख्या से जुड़ा है।

NGT सदस्यों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई, 8 सितंबर से पहले होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सदस्यों के कार्यकाल से जुड़े मामले की सुनवाई 8 सितंबर से पहले करने पर सोमवार को सहमति जताई। यह मामला पहले 15 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने NGT बार एसोसिएशन की ओर से जताई गई चिंता के बाद सुनवाई जल्द करने पर सहमति दी।

NGT बार एसोसिएशन की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सदस्यों के कार्यकाल को केवल 8 सितंबर तक बढ़ाया है। इसके बाद दक्षिणी क्षेत्र और पश्चिमी क्षेत्र समेत तीन जोनल बेंच के कामकाज पर असर पड़ सकता है। वकील ने कहा कि NGT अधिनियम के तहत एक सदस्य वाली बेंच का प्रावधान नहीं है। ऐसे में अगर सदस्यों का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया या नई नियुक्तियां नहीं हुईं तो संबंधित बेंच काम नहीं कर पाएंगी।

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