कहा- भारत हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
काठमांडो, 31 अगस्त 2026। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
नई दिल्ली में नेपाली दूतावास पहुंचे राजनाथ सिंह, प्राकृतिक आपदा पर जताई संवेदना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास का दौरा किया और शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर कर अपनी संवेदना व्यक्त की। राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत सरकार और देश की जनता की ओर से मैं 26 अगस्त 2026 को आई बाढ़ में हुई बहुमूल्य जनहानि और बड़े पैमाने पर हुई तबाही के लिए नेपाल की जनता और उसकी सरकार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। इस दुखद प्राकृतिक आपदा से नेपाल के नागरिकों के साथ-साथ भारतीय नागरिकों सहित कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के साथ हैं। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। एक करीबी मित्र और साझेदार तथा ‘सुख-दुख के साथी’ के रूप में भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा रहा है। इस कठिन समय में भी हम अपने नेपाली भाइयों और बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और खोज, बचाव तथा पुनर्वास के प्रयासों में नेपाल को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
लापता लोगों के परिजनों ने सुनाई आपबीती
नेपाल के बिदूर में बाढ़ में लापता एक मजदूर की पत्नी ने कहा, “मेरे पति ऊपरी हिस्से में गाड़ी में थे; वे एक कोरियाई कंपनी के लिए काम करते थे। घटना के समय उनके साथ एक और व्यक्ति था; बताया जा रहा है कि वह गाड़ी के साथ बह गया। उनसे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कोई खबर नहीं है। अगर कोई मदद मिल सके तो अच्छा होगा, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है; कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।”
नेपाल में लापता लोगों के खोज में परिजनों ने लगाए पोस्टर
नेपाल में अचानक आई बाढ़ में लापता हुए लोगों के परिवार और रिश्तेदार लापता और मृतकों की सूची में अपने प्रियजनों के नाम खोज रहे हैं। वहीं, परिजनों ने जगह-जगह पर लापता के पोस्टर भी लगाए हैं। वहीं, राहत और बचाव कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
नेपाल में 903 पहुंचा बाढ़ में जान गंवाने वालों का आंकड़ा
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की ओर से जारी किए गए ताजा जानकारी के मुताबिक बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 4247 लोग लापता बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाया गया है. वहीं, घायलों की संख्या 267 है। वहीं, चीन ने अब तक 16 लोगों की मौत की ही पुष्टि की है। साथ ही 500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी भी दी है।
पनबिजली संयंत्र के 933 कर्मचारी सुरंगों में फंसे होने की आशंका
राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण ने बताया कि नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद कम से कम 933 जलविद्युत परियोजना कर्मचारी सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है।
त्रिशूली नदी के उफान में झूला पुल बहा, 400 परिवारों का रास्ता बंद
नेपाल के मध्य हिस्से में रविवार सुबह त्रिशूली नदी में फिर बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ में एक सस्पेंशन ब्रिज यानी झूला पुल बह गया। यह पुल गंडकी प्रांत के गोरखा जिले की गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी से जोड़ता था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ करीब तीन घंटे तक रही। इस दौरान सुबह करीब साढ़े 11 बजे पुल बह गया। बाढ़ में पुल बह जाने के बाद गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-7 और 8 के लोगों का पृथ्वी राजमार्ग से संपर्क टूट गया है।
दूसरी बाढ़ के खतरे ने बढ़ाई बचाव अभियान के लिए चुनौती
नेपाली अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी नदी में मलबे के जमाव के कारण एक झील बन गई है। इस प्राकृतिक अवरोध के टूटने पर दूसरी बार बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है। चीन ने भी तिब्बत में बनी एक ऐसी ही प्राकृतिक झील को लेकर खतरे की चेतावनी दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में अतिरिक्त पानी इस पहले से बाधित नदी तंत्र में पहुंच सकता है। दोबारा बाढ़ की आशंका के चलते बचाव अभियान के सामने भी बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।
नेपाल बाढ़ लाइव: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे नेपाली दूतावास, कहा- भारत हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा
नेपाल में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को अभियान में लगाया गया है। फंसे हुए लोगों को निकालने और भोजन, दवाइयां तथा अन्य राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निजी हेलीकॉप्टरों को भी अभियान में लगाया गया है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए दर्जनों चार्टर उड़ानों का संचालन किया गया है।


