
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
बिलासपुर 12 अप्रैल 2026। हिंद खदान मजदूर फेडरेशन (एचएमएस) के उप महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने सक्ती जिले के सिंधीतराई स्थित थर्मल पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुई भीषण स्टीम बॉयलर दुर्घटना की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग करते हुए कहा है कि यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं बल्कि देश की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था, निरीक्षण प्रणाली, आउटसोर्सिंग नीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गंभीर विफलता का परिणाम प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना की दंडाधिकारी जांच और दर्ज एफआईआर पर कार्यवाही अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़ रही है। हादसे के इतने समय बाद भी तकनीकी, प्रशासनिक और प्रबंधकीय जिम्मेदारियों पर स्पष्टता सामने नहीं आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में विगत वर्षों में बार- बार स्टीम बॉयलर और अन्य औद्योगिक हादसे हुए हैं। ऊंचाहार एनटीपीसी दुर्घटना (2017), नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन हादसे (2020 ) तथा अन्य घटनाओं के बावजूद सुरक्षा प्रबंधन में मूलभूत सुधार दिखाई नहीं देता। इससे यह प्रश्न उठता है कि निरीक्षण, रखरखाव और सुरक्षा अनुपालन की व्यवस्थाएं वास्तव में कितनी प्रभावी हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में उत्पादन, रखरखाव, निरीक्षण और सुरक्षा संबंधी अनेक जिम्मेदारियां आउटसोर्सिग तथा ज्वाइंट वेंचर संरचनाओं में विभाजित कर दी जाती हैं, जिससे दुर्घटना होने पर वास्तविक जवाबदेही धुंधली हो जाती है। मजदूरों की सुरक्षा का प्रश्न कॉर्पोरेट संरचनाओं और ठेका व्यवस्थाओं के बीच खो जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ब्वायलर निरीक्षण व्यवस्था में प्रत्यक्ष सरकारी ढांचे को कमजोर कर निजी एवं आउटसोर्सिंग आधारित मॉडल को बढ़ावा दिया गया है, जबकि अनेक राज्यों में ब्वायलर निरीक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। छत्तीसगढ़ में भी निरीक्षण तंत्र आवश्यकता की तुलना में अत्यंत सीमित बताया जाता है।
श्रमिक नेता ने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं। इसके बावजूद सुरक्षा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने के ठोस प्रमाण दिखाई नहीं देते !
उन्होंने मांग की किः
1. वेदांता पावर प्लांट हादसे की न्यायिक जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए। हादसे से संबंधित सभी तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां सार्वजनिक की जाएं।
2. ब्वायलर निरीक्षकों की सीधी भर्ती तत्काल शुरू की जाए।
3. औद्योगिक सुरक्षा निरीक्षण की आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समीक्षा की जाए ।
4. घायल श्रमिकों और मृतकों के परिवारों के लिए घोषित राशि अपर्याप्त है, पुनर्वास की दीर्घकालीन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ।
अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि यदि औद्योगिक सुरक्षा को केवल कागजी अनुपालन और स्व-प्रमाणन (सेल्फ सर्टिफिकेशन) के भरोसे छोड़ दिया गया, तो भविष्य में भी ऐसी दुखद घटनाएं होती रहेंगी।


