‘महिला आरक्षण के मामले में गिरगिट की तरह रंग बदल रही कांग्रेस’, सपा पर भी बरसीं मायावती

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

लखनऊ 17 अप्रैल 2026। बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर कहा कि सत्ता में रहने पर कांग्रेस ने कभी भी एससी-एसटी और ओबीसी समाज के हितों का ध्यान नहीं रखा और अब इन वर्गों की महिलाओं की बात कर रही है। इसी तरह सपा का भी एससी-एसटी और ओबीसी के प्रति सत्ता में रहने पर तिरस्कारपूर्ण रवैया रहता है।

उन्होंने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि 

1. देश के अनुसूचित जाति-जनजाति व पिछड़े समाज के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के मामले में कांग्रेस गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने पार्टी भी महिला आरक्षण में, जो अब इन वर्गों की बात कर रही है, वो यही कांग्रेस पार्टी है जिसने अपनी केन्द्र की सरकार के रहते हुये किसी भी क्षेत्र में इनके आरक्षण के कोटे को पूरा कराने की कभी पहल नहीं की। 

2. तथा ना ही ओबीसी समाज हेतु मण्डल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू किया जिसे फिर बसपा के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार में अनततः लागू किया गया था, जो सर्वविदित है। 

3. इसी प्रकार, यूपी में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में ही आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठण्डे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहां बसपा की दिनांक 3 जून सन 1995 में पहली बनी सरकार ने इसे तुरन्त लागू किया। अब यही सपा अपना रंग बदलकर अपने राजनैतिक स्वार्थ में इनकी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है। 

4. इस प्रकार, अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किन्तु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है। अतः इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा तभी कुछ बेहतर संभव हो पाएगा। 

5. जहां तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन् 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केन्द्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही यही कदम उठाती। 

6. कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में एससी, एसटी  व ओबीसी एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है।

7. इसीलिये महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा अर्थात इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है। 

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