
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 23 दिसंबर 2025। ग्रामीण रोजगार को लेकर नए कानून वीबी जी राम जी पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर इस कानून को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि गांव स्तर पर सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों को योजना के वास्तविक लाभ समझ में आ सकें। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विभिन्न राज्यों से आए रोजगार सहायकों के साथ बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी कानून ऐतिहासिक है। यह कानून मनरेगा की जगह लाया गया है और इसे ज्यादा व्यावहारिक तथा प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। मंत्री ने कहा कि योजना को लेकर फैल रही गलत धारणाओं को दूर करना सरकार की प्राथमिकता है।
प्रशासनिक खर्च में बढ़ोतरी
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि नए ग्रामीण रोजगार कानून में प्रशासनिक खर्च की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है। इसके तहत कुल प्रस्तावित बजट एक लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये में से 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा राशि कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि इससे जमीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों की दिक्कतें कम होंगी।
सख्त निगरानी का भरोसा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक खर्च में बढ़ोतरी का मतलब फिजूलखर्ची नहीं है। उन्होंने कहा कि वाहनों या गैर-जरूरी चीजों पर खर्च रोकने के लिए सख्त निगरानी की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त राशि रहे और किसी तरह की बर्बादी न हो।
रोजगार के दिन बढ़े
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जहां मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं वीबी-जी राम जी कानून में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि रोजगार की गारंटी को और मजबूत करना है। साथ ही, बेरोजगारी भत्ता और वेतन भुगतान में देरी पर मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है। मजदूरी की मौजूदा दरें जारी रहेंगी और हर साल बढ़ोतरी होगी।


