शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले हलचल

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे, जहां मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स स्तर की 25वें दौर की वार्ता होगी। यह बैठक दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की कोशिशों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संभावित भागीदारी की चर्चा है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश में चीनी गतिविधियों और दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मतभेदों के बीच भारत लगातार LAC पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम बता रहा है।
मंगलवार को होगी 25वें दौर की वार्ता
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, डोभाल और वांग मंगलवार को SR स्तर की बातचीत के 25वें दौर में शामिल होंगे। दोनों नेता भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए नियुक्त स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स हैं। यह प्रक्रिया 2003 में भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े जटिल विवाद का व्यापक समाधान तलाशने के लिए शुरू की गई थी।
तनाव कम करने में अहम रही है SR वार्ता
हालांकि इस प्रक्रिया के जरिए सीमा विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी इस व्यवस्थित वार्ता तंत्र को सीमा पर समय-समय पर पैदा होने वाले तनाव को कम करने और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत बनाए रखने के लिए उपयोगी मानते हैं।
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले बातचीत
आगामी बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने वाले हैं। हालांकि शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी चीनी राष्ट्रपति के सम्मेलन में शामिल होने को लेकर आशावादी हैं। अगर शी भारत आते हैं, तो शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक का रास्ता भी खुल सकता है। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नई पहलों पर चर्चा होने की संभावना है।
तियानजिन में पिछले साल मिले थे मोदी और शी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग पिछले साल अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
जयशंकर बोले- अच्छे संबंधों के लिए सीमा पर शांति जरूरी
बीजिंग में डोभाल और वांग की बातचीत से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को एक बार फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के कथित आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।
2020 से 2024 के बीच रहा मुश्किल दौर: जयशंकर
जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में कहा, ‘मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था। उन्होंने कहा, ‘आखिरकार, अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है और सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।’
अरुणाचल में चीनी गतिविधियों पर बीजिंग का दावा
अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा था कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने बताया कि चीन और भारत के बीच चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं बैठक हुई है। दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।
भारत ने LAC पर शांति को बताया सबसे जरूरी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था कि भारत चीन के साथ सीमा क्षेत्रों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना “सबसे जरूरी” है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।
अरुणाचल के नाम बदलने पर चीन को भारत का जवाब
इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के भारत के फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि अरुणाचल प्रदेश देश का ‘अटूट और अभिन्न’ हिस्सा है और कोई भी कदम इस ‘अविवादित सच्चाई’ को बदल नहीं सकता।
2017 से अरुणाचल के लिए नाम जारी कर रहा चीन
चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है और 2017 से इस क्षेत्र के लिए अपने नामों की सूची जारी करता रहा है। भारत ने चीन के इस कदम को ‘बेकार और बेतुका’ करार दिया है। नई दिल्ली का कहना है कि ऐसी हरकतें इस ‘अविवादित’ सच्चाई को नहीं बदल सकतीं कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।


