कॉर्पाेरेट परस्त मोदी सरकार के ईपीएफओ नियम में बदलाव से कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड को बड़ा नुकसान – कांग्रेस

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नए नियम में नियोक्ता/कंपनी का अंशदान, 12 प्रतिशत की बाध्यता हटाकर मात्र 1,800 तक ही सीमित कर दिया गया है


छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

रायपुर 05 जुलाई 2026। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के लिए जारी नए नियमों को केंद्र सरकार द्वारा थोपा गया कर्मचारी विरोधी निर्णय बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि टेक-होम सैलरी बढ़ने का लालच और तात्कालिक लाभ का झांसा देकर करोड़ों कर्मचारियों और उनके परिवार के भविष्य पर प्रहार किया है, कॉर्पाेरेट परस्त नीतियों के चलते, निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए ही यह षडयंत्र रचा गया है। मोदी सरकार ने नियोक्ता के अंशदान के दायित्व, मूल वेतन के 12 प्रतिशत की बाध्यता को हटाकर मात्र 1800 रुपए प्रति माह तक सीमित कर दिया है। अब नए नियमों के तहत कर्मचारी और कंपनी का 12 प्रतिशत योगदान केवल वैधानिक वेतन सीमा, जो वर्तमान में 15,000 रुपये है के 12 प्रतिशत तक ही अनिवार्य है, जो कि 1800 रुपये महीने होता है, इसके ऊपर के मूल वेतन पर पीएफ कटौती पूरी तरह से कर्मचारियों और नियोक्ताओं की इच्छा पर छोड़ दिया गया है, इससे भविष्य के लिए जुड़ने वाली सामाजिक सुरक्षा राशि घट जाएगी, टेक-होम सैलरी (Take-home salary) बढ़ने का प्रलोभन देकर कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पुरानी ईपीएफ योजना 1952 के तहत पीएफ कटौती पर फैसले का अधिकार कर्मचारियों के पास था, लेकिन नए नियम में अब यह अधिकार सरकार ने कर्मचारियों से छीनकर कंपनियों को दे दिया है। पहले 12 प्रतिशत तक पीएफ कटौती चुनने का अधिकार कर्मचारियों को था और उतनी ही राशि नियोक्ता/कंपनी के द्वारा संबंधित कर्मचारी के पीएफ फंड में जमा करने की बाध्यता थी, जिसे अब कंपनियों की मर्जी पर छोड़ दिया गया है, कानूनी बाध्यता केवल 18 सौ रुपए की रह गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि प्रतिमाह 15000 से अधिक वेतन वाले कर्मचारियों को नए नियम से बड़ा नुकसान है, यदि किसी कर्मचारी का वेतन 50 हजार है तो उसका 12 प्रतिशत 6000 होता है, जो नियोक्ता अंशदान के तौर पर देने बाध्य था लेकिन अब कंपनियों का यह दायित्व 1800 तक ही सीमित कर दिया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी का मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि नियोक्ता द्वारा मात्र 18 सौ रुपए महीने ही पीएफ में जमा होगा तो रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला पैसा बहुत ही कम होगा, पी एफ कटौती पर अन्य जमा योजनाओं की तुलना में ब्याज अधिक है, जितनी बड़ी रकम उतना ज्यादा ब्याज, तो उस ब्याज का भी नुकसान कर्मचारियों को निश्चित है।

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