सुकमा में रंग लाई ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ योजना, गणेश समेत कुपोषित बच्चों को मिली नई जिंदगी

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

सुकमा 29 जून 2026। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत कुपोषण से प्रभावी तरीके से निदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत जिले की गुमडी गांव में आयोजित हेल्थ कैंप में जाँच के दौरान चार बच्चों की हालत चिंताजनक पाई गई। गणेश नाम के छह महीने के बच्चे में गंभीर कुपोषण और एनीमिया की पहचान हुई। जांच के समय बच्चे का वजन लगभग दो किलोग्राम था और उसका हीमोग्लोबिन 4.7 था, जिसके बाद उसे न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा गया, जिससे उसकी हालत में सुधार हुआ है। कुपोषण और एनीमिया से गंभीर रूप से पीड़ित छह महीने के गणेश को नया जीवन मिला है। कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर संध्या नाग ने बताया कि जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत गुमडी और उसके आस-पास के गाँवों में पहुँची, तो हेल्थ चेक-अप के दौरान गणेश समेत चार बच्चों की पहचान कुपोषित के तौर पर की गई। उन्होंने बताया कि जाँच के नतीजों के बाद, सभी बच्चों को जिला अस्पताल के एनआरसी में भेजा गया। गणेश की गंभीर हालत को देखते हुए उसे विशेष निगरानी में रखा गया और उसका इलाज शुरू किया गया है। बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

नाग ने बताया कि गंभीर एनीमिया के कारण उसे ब्लड ट्रांसफ़्यूजन की जरूरत पड़ी। इसके बाद उसकी हालत तेजी से सुधरने लगी। जिले में लगातार की जा रही कोशिशों से कुपोषण और माताओं व बच्चों की मृत्यु दर में कमी नजर आ रही है। दूर-दराज के इलाकों में भी हेल्थकेयर सर्विस बढ़ाई जा रही है ताकि कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे। सीएचओ अंजलि बघेल का कहना है कि कुपोषण से निपटने के लिए हर मंगलवार और शुक्रवार को आंगनवाड़ी सेंटर्स में ‘विलेज हेल्थ सैनिटेशन एंड न्यूट्रिशन डे’ आयोजित किया जाता है। इन सेशन के दौरान बच्चों की लंबाई और वजन की नियमित रूप से जाँच की जाती है। इन मापों के आधार पर यह तय किया जाता है कि बच्चा स्वस्थ है या कुपोषित, और फिर इलाज का तरीका तय किया जाता है।

जिला प्रशासन अब शिक्षा को सेहत और पोषण से जोड़ने पर काम कर रहा है। आंगनवाड़ी सेंटर्स को ‘बालवाड़ी’ से जोड़कर, प्राइमरी स्कूल के टीचरों के बच्चों के साथ समय बिताने की योजना बनाई जा रही है ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफ़िसर डॉ. आरके सिंह के अनुसार, ज़िले में सुकमा, कोंटा और छिंदगढ़ में तीन एनआरसी चल रहे हैं। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को पोषण सुधारने के लिए यहाँ लगभग 15 दिनों तक भर्ती किया जाता है। बच्चों को तय डाइट चार्ट के हिसाब से पौष्टिक खाना, साफ-सुथरा माहौल और नियमित हेल्थ चेक-अप की सुविधा दी जाती है। गणेश का इलाज भी इसी तरह किया गया।

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