ममता के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची ईडी, कहा- उनके कृत्य लूट और डकैती जैसे

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 13 जनवरी 2026। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा कि 8 जनवरी को कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस अधिकारियों ने जो किया वह चोरी, लूट, डकैती के दायरे में आता है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने ममता और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग करते हुए एक याचिका दायर की है। याचिका में ईडी ने कहा, ‘हमारे अधिकारी 2,742 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय से जुड़े बहु-राज्यीय कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में कानूनी रूप से तलाशी अभियान चला रहे थे। तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और भारी संख्या में पुलिस बल के साथ कथित तौर पर परिसर में घुस गए।’

ईडी ने ममता बनर्जी पर लगाए क्या आरोप?
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा, ‘इन्होंने ईडी अधिकारियों को धमकाया, उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिया और लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेजों सहित जब्त की गई सामग्री को जबरन हटा दिया। ये कृत्य भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत चोरी, डकैती, लूट, आपराधिक अतिक्रमण, लोक सेवकों के काम में बाधा डालना, सबूतों को नष्ट करना और आपराधिक धमकी के दायरे में आते हैं। ईडी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर अपनी रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई को निर्देश देने की प्रार्थना की कि वह 8 जनवरी की घटनाओं के संबंध में एफआईआर दर्ज करे और स्वतंत्र जांच करे। ईडी के अनुसार, जब उसके अधिकारी कोलकाता में प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय में तलाशी ले रहे थे तब ममता और पुलिस अधिकारयों ने इसमें बाधा डाली और जरूरी दस्तावेज छीनकर ले गए।

ईडी ने राज्य अधिकारियों द्वारा जब्त किए गए सभी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तत्काल जब्ती, सीलबंदी, फोरेंसिक संरक्षण और बहाली की मांग की है। साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस को पीएमएलए कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए एक निषेधाज्ञा जारी करने की भी मांग की है।

अधिकारियों को दमनकारी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग
ईडी ने पीएमएलए की धारा 67 के तहत वैधानिक प्रतिरक्षा का हवाला देते हुए ऐसी सभी एफआईआर को सीबीआई को स्थानांतरित करने और अपने अधिकारियों को किसी भी प्रकार की दमनकारी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। सांविधानिक उपायों के विफल होने पर प्रकाश डालते हुए, ईडी ने शीर्ष अदालत को बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट में राहत पाने का उसका प्रयास अदालत कक्ष के अंदर सुनियोजित हंगामे के बाद विफल हो गया। इसके कारण न्यायाधीश को सुनवाई के लिए अनुकूल वातावरण न होने की टिप्पणी करते हुए मामले को स्थगित करना पड़ा।

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