
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
मुंबई 11 अप्रैल 2026। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संकेत दिए हैं कि महिलाओं को संसद में उनका हक मिलने का इंतजार अब खत्म होने वाला है। गोवा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) के सम्मेलन के दौरान बिरला ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महत्वपूर्ण संशोधन के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, जिसमें सभी दलों के सहयोग से इसे सर्वसम्मति से पारित होने की उम्मीद है।
2034 नहीं, अब 2029 में ही मिलेगा आरक्षण!
इस खबर का सबसे बड़ा पहलू यह है कि जो आरक्षण पहले वर्ष 2034 में लागू होने वाला था, उसे अब 2029 के आम चुनावों से ही लागू करने की तैयारी है। इसके लिए कानून में जरूरी तकनीकी और संवैधानिक बदलाव किए जाएंगे। ओम बिरला ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में जब नई संसद का उद्घाटन हुआ था, तब यह सर्वसम्मति से पास होने वाला पहला कानून था। अब सरकार इसे समय से पहले धरातल पर उतारने के लिए गंभीर है।
816 सीटें और 273 महिला सांसद
प्रस्तावित संशोधनों के बाद लोकसभा का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। नए खाके के मुताबिक, लोकसभा की कुल सदस्य संख्या बढ़ाकर 816 की जा सकती है। इसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ओम बिरला ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं, ऐसे में देश के कानून बनाने की प्रक्रिया में उनकी संख्या बढ़ना जरूरी है। उनके आने से शासन व्यवस्था अधिक संवेदनशील और आम जनता के करीब होगी।
संसद की मर्यादा पर कड़ा रुख
महिला आरक्षण के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के भीतर गिरते अनुशासन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संसद सार्थक चर्चा का केंद्र है, न कि हंगामे का। अब सदन में नारेबाजी, पोस्टर और बैनर ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। उन्होंने कहा कि असंसदीय भाषा के इस्तेमाल को रोकने के लिए सभी दलों ने सहमति जताई है और इसे अब कड़ाई से लागू किया जाएगा। बिरला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर कहा कि गवर्नेंस में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन एआई के दुरुपयोग से बचने के लिए हमें सतर्क रहना होगा।


