
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
मुंबई 11 जुलाई 2025। महाराष्ट्र विधानसभा ने गुरुवार को ‘महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक’ जिसे जन सुरक्षा कानून के नाम से भी जाना जाता है, को ध्वनिमत से पारित कर दिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तरफ से पेश इस विधेयक का उद्देश्य वामपंथी उग्रवाद, खासकर शहरी नक्सलवाद को नियंत्रित करना है। हालांकि विधानसभा से पास होते ही ये विधेयक विवादों में फंस गया और विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वहीं सरकार का दावा है कि यह कानून देश विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों पर कार्रवाई के लिए जरूरी है।
‘इस बिल का मकसद सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों को चुप कराना’
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने जन सुरक्षा कानून के पारित होने पर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे जनता की आवाज दबाने और सरकार की नाकामियों को छिपाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि ‘कांग्रेस इस तरह के विधेयकों का हमेशा विरोध करेगी, क्योंकि यह जनता के अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। यह विधेयक जन सुरक्षा के नाम पर लाया गया है। लेकिन, इसका मकसद सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों को चुप कराना है।’
‘सरकार का मकसद मनुस्मृति को बढ़ावा देना’
वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार मौजूदा कानूनों का उपयोग करने के बजाय इस विधेयक के जरिए संविधान की रक्षा करने वालों को देशद्रोही ठहराना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का असली उद्देश्य मनुस्मृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी खास धर्म को निशाना बनाकर बयान देना गलत है। वोट जुटाने के लिए धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की कोशिश को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजय वेडट्टीवार ने मांग की कि धार्मिक मुद्दों पर बात करते समय सभी धर्मों के लिए समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। यह विधेयक सरकार की असफलताओं को छिपाने और जनता के विरोध को कुचलने का हथकंडा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने हक के लिए आवाज उठाएं और ऐसे कानूनों का विरोध करें।


