गडकरी बोले- आंदोलन सिर्फ मंदिर के लिए नहीं था, बल्कि न्याय और संस्कृति को वापस पाने के लिए था

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 15 जनवरी 2024। 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन होने वाला है। भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा के लिए सभी हिंदुओं में उत्साह है। इस बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अयोध्या आंदोलन सिर्फ एक मंदिर के लिए नहीं था। यह न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक जागरुकता अभियान था। आंदोलन भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत को गौरव और सम्मान वापस दिलाने के लिए था। भगवान राम का जहां जन्म हुआ था, वहां राम मंदिर की मौजूदगी देश में रहने वाले सभी लोगों के लिए गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। यह मुद्दा सांप्रदायिक या जाति-संबंधी नहीं था। यह राष्ट्रीय जन भावना के लिए था। सनातन हमारे देश का इतिहास है। केंद्रीय मंत्री गडकरी रविवार को नागपुर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में गडकरी ने कहा कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के कारण ही अयोध्या के राम मंदिर का मुद्दा देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन सका। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अशोक सिंघल, भाजपा नेता उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा और कई साधु-संतों और तमाम शंकराचार्यों ने इसके लिए संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि देश के लोग अब बहुत खुश हैं। भगवान राम के जन्मस्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। 22 जनवरी से देशवासियों को अपने ईश्वर के दर्शन का समय मिलेगा।  

गडकरी ने आगे कहा कि अतीत में राजनीतिक लाभ के लिए लोगों ने धर्मनिर्पेक्ष शब्द की गलत व्याख्या कर दी। धर्मनिर्पेक्ष शब्द का अर्थ सर्व धर्म संभाव होता है यानि, हर धर्म के लिए सम्मान। अयोध्या आंदोलन तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ था। हमारे देश के गौरव, संस्कृति और इतिहास को पिछली सरकार ने दरकिनार कर दिया था। 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया। कोर्ट ने इतिहास, सच्चाई और सबूतों के आधार पर न्याय किया। प्रभु श्रीराम के अनुयायियों को वर्षों बाद न्याय मिला। 

गडकरी ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार कहते थे कि देश में हिंदू शासक थे। बावजूद इसके कई विदेशी शासकों ने हम पर शासन किया। भारतीयों को जाति से ऊपर उठकर खुद को हिंदू संस्कृति, हिंदू इतिहास और हिंदू जीवन शैली के प्रति समर्पित करना चाहिए। हिंदू भारतीय संस्कृति है। भारतीय संस्कृति ही हिंदुत्व का प्रर्याय है। हिंदू सभी को समाहित करने वाला है, राष्ट्र का गौरव है और हिंदुत्व का इतिहास राष्ट्र का इतिहास है।

वहीं, हैदराबाद में केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने रविवार को कहा कि राम मंदिर सिर्फ एक आध्यात्मिक कार्यक्रम है। इसका चुनाव से कोई मतलब नहीं है। देश के हिंदू ही नहीं बल्कि मुसलमान सहित सभी लोग इस शुभ घड़ी का इंतजार कर रहे हैं।  यह पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। भारत के साथ-साथ दुनिया भर के हिंदुओं के लिए यह गौरव का विषय है। राम मंदिर 550 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। राम मंदिर के लिए अनगिनत लोगों ने युद्ध लड़ा। कई लोग राम मंदिर के लिए शहीद हुए। यह जन आस्था का विषय है। इसे राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। आयोजन सिर्फ भगवान के भक्त कर रहे हैं। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमारी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता रामभक्त के रूप में ही कार्यक्रम में भाग लेंगे।

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