पहली बार मूक-बधिर वकील ने सु्प्रीम कोर्ट में केस लड़ा, इशारों में समझाई अपनी बात… सीजेआई भी हुए हैरान

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 26 सितम्बर 2023। सुप्रीम कोर्ट में पहली बार मूक-बधिर वकील ने सांकेत‍िक दुभाष‍िये की मदद से केस में बहस की जिसे देखर अदालत में मौजूद हर शख्स हैरान रह गया। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने मूक-बधिर वकील सारा सनी को बहस करने की इजाजत दी। एडवोक्ट सारा ने इशारों से अपनी दलीलें पेश कीं जिसे दुभाषिये सौरव रॉय चौधरी ने कोर्ट के सामने समझाया। बेंगलुरु की रहने वाली मूक बधिर वकील सारा सनी को वर्चुअली कोर्ट के सामने लाने के लिए वीडियो स्क्रीन स्पेस देने से कोर्ट के कंट्रोल रूम ने मना कर दिया था। हालांकि बहस शुरू हुई और स्क्रीन पर सौरव रॉय चौधरी, सारा से मिले इशारे कोर्ट को समझाने लगे।

टाइम्‍स ऑफ इंड‍िया की रि‍पोर्ट के मुताब‍िक बहस के दौरान जब चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने इशारे समझकर सौरव रॉय चौधरी को दलीलें देते सुना तो स्टाफ और सौरभ दोनों से कहा कि सारा सनी को भी स्क्रीन पर जगह दी जाए। इसके बाद दोनों स्क्रीन पर आए और अपनी बात कोर्ट को समझाई। CJI की सहम‍त‍ि के बाद ही वर्चुअल कोर्ट पर्यवेक्षक ने सारा और सौरव के लिए ऑनलाइन सुनवाई विंडो को खोला। सारा सनी की पेशी का इंतजाम एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड संचिता ऐन ने करवाया। शुक्रवार को एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड संचिता ऐन ने CJI डी. वाई. चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठ से एक असामान्य अनुरोध किया था।

उन्‍होंने अनुरोध क‍िया था क‍ि बधिर वकील सारा सनी को सांकेतिक भाषा दुभाषिया सौरव रॉय चौधरी की मदद से द‍िव्‍यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों से संबंधित एक मामले पर वस्तुतः बहस करने की अनुमति दी जाए, इसके बाद सीजेआई की सहमत‍ि से सारा और सौरव के लिए ऑनलाइन सुनवाई विंडो खोली गई। केस क्रम संख्या 37 पर सूचीबद्ध था। दुभाषिये ने बड़ी ही तेजी से हाथ और उंगलियों के माध्यम से सारा को अदालत के समक्ष कार्यवाही के बारे में बताया क‍ि किसने क्या कहा। इस मामले में CJI की अगुआई वाली पीठ ने जैसे ही कार्यवाही शुरू की तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा क‍ि जिस गति से दुभाषिया ने वकील को अदालती कार्यवाही के बारे में बताया वह आश्चर्यजनक है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिव्यांग जनों को मिलने वाली सहायता, समान सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत अन्य लोगों को मिलने वाली सहायता की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए मामले पर सुनवाई को लेकर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। पीठ ने साथ ही अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एश्वर्य भाटी से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का सहयोग करने का अनुरोध किया।

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