
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
जम्मू-कश्मीर 24 फरवरी 2026। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारतीय सेना के जांबाज जवानों के साथ-साथ खोजी कुत्तों की भूमिका हमेशा से बेहद अहम रही है।किश्तवाड़ में ऑपरेशन के दौरान टायसन की भूमिका अहम रही। आतंकियों के ठिकाने का सटीक पता इसी बहादुर श्वान ने लगाया था और मुठभेड़ शुरू होते ही आतंकियों की पहली गोली भी टायसन ने ही खाई। किश्तवाड़ के छात्रू में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में पहला मौका नहीं है जब सेना के इन मूक प्रहरियों ने ऑपरेशनों में अपनी जान पर खेलकर जवानों की मदद की है। सेना के श्वानों ने देश के लिए पहले भी अपना खून बहाया है। 28 अक्तूबर 2024 को अखनूर सेक्टर में एक आतंकरोधी ऑपरेशन के दौरान गोलीबारी में खोजी कुत्ते फैंटम ने देश के लिए शहादत दी थी।
सितंबर 2023 में राजोरी में एक मुठभेड़ के दौरान फीमेल लेब्राडोर केंट ने भी सर्वोच्च बलिदान दिया था। आतंकियों का पीछा करते हुए केंट ही ऑपरेशन को लीड कर रही थी तभी अचानक फायरिंग शुरू हो गई और अपने हैंडलर को बचाने के लिए केंट ने खुद गोली खाकर अपनी जान दे दी। इन बेजुबान योद्धाओं की बहादुरी और वफादारी सेना के हर ऑपरेशन की एक बड़ी ताकत है।


