खेतों की मेड़ों पर उगने वाली सब्जी है बड़े कमाल की, डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

बिलासपुर 15 सितम्बर 2023। ककोड़ा यानी छोटा करेला जो एक सब्जी है ये राजस्थान में मॉनसून में खेतों की मेड़ों पर लगता है. यह बारिश के मौसम में हरा और कच्चा होता है लेकिन जैसे ही बारिश का मौसम खत्म होता है तो यह पककर लाल होता है. यह खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है. वहीं इस सब्जी का उपयोग आयर्वेदिक दवाइयों में भी किया जाता है। लाल ककोड़ा सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा क्योंकि जब भी ककोड़ा की बात की जाती है तभी हरा ककोड़ा/छोटा करेला की याद आती है. जी हां… हरा ककोड़ा पककर अपना रुप बदल लेता है इसे ही लाल ककोड़ा/लाल करेला कहते है. इन दिनों नागौर में इस सब्जी का उपयोग किया जा रहा है. खास बात यह है कि इसके सेवन से शरीर को कई फायदे होते है. इसका मुख्य उपयोग सब्जी बनाने व आयुर्वेद की दवाईयां बनाने में किया जाता है।

आयुर्वेद के जानकार डॉक्टर विनय ने बताया कि छोटा करेला या ककोड़ा का उपयोग कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. मधुमेह से पीड़ित रोगियों के लिए यह करेला एक रामबाण इलाज है. मधुमेह रोगियों को इसके पचांग यानी फूल, जड़, पत्ते, तने व फल सबका उपयोग करके मधुमेह रोगी को दवाई दी जाती है. पीताशय मे यदि पीत की मात्रा बढ़ जाती है तो यह पीत क्षारक के रुप मे कार्य करता है।

यह पीत रस की मात्रा को कम करता है. इसके सेवन से आंखो को फायदा होता है. क्योंकि इसमें विटामिन ए व सी होता है इसका ज्यूस बनाकर पीने से व्यक्ति की पाचन शक्ति बढ़ती है भूख लगना आरंभ हो जाती है. ककोड़ा/करेला का उपयोग त्वचा से संबंधित बीमारियों के उपचार मे किया जाता है।

ज्यादा सेवन से हो सकता है नुकसान
आयुर्वेदिक डॉ. विनय ने बताया कि इसके ज्यादा सेवन से बॉडी मे ड्राईनेस आ जाती है. ज्यादा ड्राईनेस आने पर आप काली मिर्च, सोंठ और पीपली का सेवन कर सकते है. चावल व घी मिलाकर सेवन करने से इस करेले की ज्यादा सेवन की मात्रा को कम किया जा सकता है. अगर आप करेला / ककोड़ा / लाल करेला का सेवन करते हो तो पहले विशेषज्ञ से सलाह लें. उनके बताए अनुसार आप इसका पाउडर या अन्य सामग्री का सेवन कर सकते है।

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