छत्तीसगढ़ खनिज नियम 2009 में संशोधन, भण्डारण अनुज्ञप्तिधारियों पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा।

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

बिलासपुर 9 जुलाई 2020। छत्तीसगढ़ शासन खनिज साधन विभाग के द्वारा छत्तीसढ़ खनन, परिवहन तथा भण्डारण नियम 2009 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन  24 जून 2020 के राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।

जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि संशोधन खनिज नियम के अनुसार खनिज भण्डारण लाइसेंसधारी को  अनुज्ञा पत्र स्वीकृत उपरांत अनुज्ञा पत्र विलेख निष्पादित करना होगा जिसका पंजीयन भारतीय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में उल्लेखित प्रावधानों के तहत् किया जाना अनिवार्य होगा। जिन्हें भण्डारण अनुज्ञप्ति पूर्व में स्वीकृत हो चुकी है उन्हें भी इस संशोधन दिनांक से 6 माह के भीतर विलेख निष्पादित किया जाना अनिवार्य होगा। समयावधि में विलेख निष्पादित नहीं किये जाने पर अनुज्ञा पत्र स्वीकृत आदेश निरस्त माना जायेगा।

पूर्व में भण्डारण अनुज्ञा पत्र के अंतरण का प्रावधान नहीं था किन्तु अब भण्डारण अनुज्ञप्तिधारी नियमों में विहित प्रावधानों के तहत् एक लाख रूपये का भुगतान कर अंतरण का आवेदन कर सकेगा तथा अनुज्ञा पत्र किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर अंतरित कर सकेगा। अंतरण उपरांत पूरक विलेख अनुबंध पत्र निष्पादित किया जाना होगा, अनुज्ञप्तिधारी को प्रतिमाह मासिक पत्रक प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा। विलंब करने पर 500 रूपए प्रतिमाह की दर से शास्ति आरोपित की जायेगी। मुख्य खनिज हेतु स्वीकृत भण्डारण अनुज्ञप्तिधारियों को स्वीकृत क्षेत्र में तौल मशीन वे-ब्रीज लगाना अनिवार्य किया गया है।

अनुज्ञप्ति क्षेत्र में लगातार एक वर्ष तक कार्य नहीं करने पर अनुज्ञप्ति लैप्स की जा सकेगी। लैप्स से बचने के लिए अनुज्ञप्तिधारी को नियम में उल्लेखित प्रावधानों के तहत् निर्धारित समयावधि में आवेदन करना अनिवार्य होगा। अनुज्ञप्तिधारी स्वेच्छा से किसी भी समय शासन के समस्त देयको का भुगतान कर आवेदन देकर अनुज्ञा पत्र समाप्त करवा सकेगा। इस संशोधन से भण्डारण अनुज्ञप्तिधारियों को जहां एक ओर भण्डारण अनुज्ञप्ति का हस्तांतरण, या समय पूर्व समाप्त करवाने की सुविधा प्राप्त होगी वहीं अनुज्ञप्ति स्वीकृति उपरांत लगातार अनुज्ञप्ति क्षेत्र में कार्य नहीं करने वालो के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रावधान भी किया गया है।

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