कैंसर से जूझ रहे पिता के लिए तीसरा स्वर्ण जीतना चाहते हैं देवेंद्र, भारत के हैं सबसे बड़े दावेदार

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

नई दिल्ली 20 अगस्त 2021। देवेंद्र झाझरिया को पैरालंपिक चैंपियन बनाने में उनके माता-पिता का बहुत बड़ा हाथ है। देवेंद्र को याद है जब वह 2004 के एथेंस पैरालंपिक में खेलने जा रहे थे तो उन्हें विदाई देने वाले अकेले उनके पिता राम सिंह थे। उस वक्त उनके पिता ने देवेंद्र से कहा था यहां से अकेले जा रहे हो लेकिन वहां पदक जीता तो दुनिया पीछे होगी। दो बार के पैरालंपिक चैंपियन भावुक देवेंद्र अपने पिता के लिए टोक्यो में तीसरा पैरालंपिक स्वर्ण जीतने के लिए जी-जान लगा देंगे। देवेंद्र के मुताबिक बीते वर्ष अक्तूबर माह में कैंसर से जूझ रहे उनके पिता ने उन्हें जबरन इस पदक के लिए गांधीनगर भेज दिया था। कुछ दिन बाद वह स्वर्ग सिधार गए और देवेंद्र उनसे अंतिम क्षणों में बात भी नहीं कर सके।

पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया

बीते वर्ष अक्तूबर माह में उनके पिता को फेफड़ों का कैंसर निकला। उन्होंने काफी जगह हाथ पैर मारे लेकिन सभी जगह जवाब दे दिया गया। वह पिता के साथ थे उनकी सेवा कर रहे थे। एक दिन पिता ने कहा कि तुम्हारे दो छोटे भाई यहां हैं। दोनों उन्हें संभाल लेंगे, लेकिन तुम यहां रुकोगे तो तुम्हारी तैयारियां प्रभावित होंगी। तुम्हें देश के लिए तीसरा पैरालंपिक स्वर्ण जीतना है जाओ गांधीनगर में तैयारियां करो। इसके बाद देवेंद्र जयपुर से गांधीनगर आ गए, लेकिन 23 अक्तूबर को फोन आया कि पिता की हालत नाजुक है। वह तुरंत वहां से भागे, लेकिन जब तक पहुंचे तब तक पिता जा चुके थे। देवेंद्र के मुताबिक यह उनके पिता थे जिन्होंने उन्हें जीवन में कभी निराश नहीं होने दिया। वह उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करते थे। आज वह गांधीनगर में तैयारी कर रहे होते हैं, लेकिन पिता के शब्द उनके दिमाग में घूमते रहते हैं। इसी लिए वह पिता के लिए टोक्यो में तीसरा स्वर्ण जीतना चाहते हैं।

बेटा बोलता है पापा घर कब आओगे

देवेंद्र खुलासा करते हैं कि वह पिता के कारण ही दोबारा गांधीनगर में तैयारियों में जुट गए। इसके बाद उन्होंने सिर्फ एक दिन के लिए घर का मुंह देखा है। उनका छह साल का बेटा उन्हें घर आने के लिए बोलता है। गुस्सा भी होता है, लेकिन वह उसे चाकलेट का बहाना बनाकर शांत कर देते हैं। बेटी और पत्नी तो अब समझने लगे हैं। 

रियो के भाले को टोक्यो में आजमाएंगे

2004 और 2016 पैरालंपिक में विश्व कीर्तिमान के साथ भाला फेंक का स्वर्ण जीतने वाले देवेंद्र इस बार भी विश्व कीर्तिमान के साथ स्वर्ण जीतने की तैयारी में हैं। देवेंद्र के मुताबिक वे उसी भाले का टोक्यो में प्रयोग करेंगे जिसका उन्होंने रियो पैरालंपिक में किया था। फिल्हाल वह तैयारियों के दौरान थ्रो में पूरी ताकत नहीं लगा रहे हैं। टोक्यो में नीरज चोपड़ा की तरह वह पूरी ताकत लगाएंगे।

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