तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट पर महिलाओं और बच्चों पर किया हमला, तोड़ा शांति बनाए रखने का वादा

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

काबुल 18 अगस्त 2021। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के साथ ही एक सबसे बड़ा डर यही उपजा कि अब देश में एक बार फिर से महिलाओं को गुलाम बनकर रहना होगा, उन्हें पढ़ने, काम करने का अधिकार तक नहीं मिलेगा। हालांकि, तालिबान ने यह वादा किया कि इस बार उनके शासन में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

काबुल से सामने आई तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि तालिबानियों ने देश छोड़ने के इरादे से हवाईअड्डे आने वाली महिलाओं और बच्चों पर नुकीले-धारदार हथियारों से वार किया है।  तालिबानी लड़ाकों ने एयरपोर्ट से भीड़ को वापस भेजने के लिए फायरिंग भी की थी। लॉस एंजिलिस टाइम्स के रिपोर्टर मार्कस यैम ने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें ट्वीट की हैं और दावा किया है कि तालिबानियों के हमले में कई लोग घायल हुए हैं।

तालिबान लड़ाके काबुल और अन्य जगहों की सड़कों पर घूम रहे हैं और पूर्व-सरकारी कर्मचारियों की तलाश में जुटे हैं। इस दौरान वे कई जगह फायरिंग भी कर रहे हैं। चैनल ने यह भी दावा किया है कि तालिबान ने तखर प्रांत में मंगलवार को एक महिला को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वह घर से बाहर बिना सिर ढंके दिखी थी। काबुल पर कब्जे के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान ने कहा कि वे 1996-2001 के बीच अपने पिछले शासन की तुलना में इस बार नरमी से कानून लागू करेंगे। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने कहा, ‘हमें अंदर या बाह कोई दुश्मन नहीं चाहिए।’ जबीउल्ला ने यह भी कहा कि महिलाओं को काम करने और पढ़ने का अधिकार मिलेगा। समाज में उनकी सक्रियता भी रहेगी लेकिन शरिया कानून के अनुसार। 

स्थानीय मीडिया की कई रिपोर्टों में इससे उलट यह दावा किया जा रहा है कि तालिबान के बढ़ते प्रभाव के बीच बहुत सी महिलाओं को उनके दफ्तरों ने नौकरी छोड़ने का आदेश दिया है।  पिछले शासनकाल में तालिबान ने महिलाओं के काम करने पर पाबंदी लगाई हुई थी। लड़कियों को स्कूल जाने का अधिकार नहीं था और महिलाएं घर से बाहर सिर्फ किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ ही निकल सकती थीं, वह भी बुर्का पहनकर।

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