
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 28 नवंबर 2024। प्रियंका गांधी ने सांसद के रूप में शपथ ले ली है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें शपथ दिलाई। इसके साथ ही देश की संसद में गांधी परिवार के एक और सदस्य का प्रवेश हो गया है। प्रियंका गांधी नेहरू परिवार की 16वीं सदस्य हैं जो लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई हैं। देश के संसदीय इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ जब लोकसभा में गांधी परिवार का कम से कम एक सदस्य न पहुंचा हो। ऐसे भी मौके आए हैं जब गांधी-नेहरू परिवार से जुड़े 5-5 सदस्य लोकसभा में एक साथ पहुंचे। मौजूदा लोकसभा में राहुल गांधी के बाद उनकी बहन प्रियंका भी संसद पहुंच गईं। राहुल और प्रियंका की मां सोनिया गांधी लंबे समय तक लोकसभा सांसद रही हैं। फिलहाल वो राजस्थान से राज्यसभा की सांसद हैं। ऐसा पहली बार होगा जब गांधी परिवार मां और उनके दो बच्चे एक साथ सांसद होंगे। प्रियंका और राहुल के एक साथ सदन में बैठते ही एक और इतिहास दोहराया गया। 71 साल पहले 1953 तक जवहार लाल नेहरू और विजयलक्ष्मी पंडित की भाई बहन की जोड़ी सदन में नजर आती थी। अब 71 साल बाद फिर से नेहरू-गांधी परिवार के भाई बहन साथ नजर आए।
पहली लोकसभा में कितने चेहरों का रिश्ता नेहरू-गांधी परिवार से था?
सबसे पहले बात पहली लोकसभा की कर लेते हैं। साल 1951-52 में देश के पहले लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में 400 लोकसभा सीटों से कुल 489 सांसद चुनकर संसद पहुंचे। जैसा की आप जानते हैं कि उस दौर में कई लोकसभा सीटें ऐसी थीं जहां से दो-दो सांसद चुने जाते थे। 1951 के इस लोकसभा चुनाव में एक सीट ऐसी भी थी जहां से तीन सासंद चुनकर लोकसभा पहुंचे थे।
इन 489 सांसदों में से पांच सांसद ऐसे थे जिनका रिश्ता नेहरू-गांधी परिवार से थे। खुद जवाहर लाल नेहरू जो इलाहाबाद जिला (पूर्व) सह जौनपुर जिला (पश्चिम) लोकसभा सीट से जीतकर देश के प्रधानमंत्री बने। नेहरू के साथ इस सीट से सांसद बनने वाले दूसरे चेहरे कांग्रेस के ही मसुरियादीन थे। जवाहर लाल नेहरू के दामाद और इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी प्रतापगढ़ जिला (पश्चिम) सह रायबरेली जिला (पूर्व) लोकसभा सीट से जीते। इसी सीट से कांग्रेस के बृजनाथ कुरील भी जीते थे क्योंकि यह सीट ऐसी थी जहां से दो सांसद चुने गए थे। सीतापुर जिला सह खीरी जिला (पश्चिम) से जीतीं उमा नेहरू भी इसी परिवार से जुड़ी थीं। दरअसल, उमा के पति श्यामलाल नेहरू पंडित जवाहर लाल नेहरू के चचेरे भाई थे। श्यामलाल नेहरू के पिता नंदलाल नेहरू जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू के बड़े भाई थे। पहले लोकसभा चुनाव में नेहरू परिवार से जीतने वाले चौथे चेहरे का नाम था विजयलक्ष्मी पंडित, विजयलक्ष्मी पंडित नेहरू की सगी बहन थीं। विजयलक्ष्मी को लखनऊ जिला मध्य सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत मिली थी। 1953 में विजयलक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष चुनी गईं। विजयलक्ष्मी इस पद के लिए चुनी गई पहली महिला थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद लखनऊ जिला मध्य सीट पर उप चुनाव हुए।
इस उपचुनाव में नेहरू परिवार से संबंध रखने वालीं श्योराजवती नेहरू जीतीं थीं। श्योराजवती की शादी डॉक्टर किशन लाल नेहरू से हुई थी। किशनलाल नेहरू के पिता का नाम नंदलाल नेहरू था। यानी, श्योराजवती प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के चचेरे भाई की पत्नी थीं। इस तरह पहले लोकसभा में नेहरू-गांधी परिवार से कुल पांच लोग लोकसभा पहुंचे। हालांकि, एक वक्त में इनकी कुल संख्या चार ही रही।
दूसरी लोकसभा में घट गई नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों की संख्या
1957 में जब देश के दूसरे लोकसभा चुनाव हुए तो 403 लोकसभा सीटों से कुल 494 सांसद चुनकर आए। इस चुनाव में नए सिरे से परिसीमन हुआ। सीटों के नाम बदले गए। जहां तक नेहरू गांधी परिवार की बात है तो इस चुनाव में इस परिवार से संबध रखने वाले तीन चेहरे जीतकर लोकसभा पहुंचे। खुद जवाहर लाल नेहरू फूलपुर लोकसभा सीट से जीते, उमा नेहरू सीतपुर लोकसभा सीट से जीतीं तो फिरोजगांधी रायबरेली सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे। हालांकि फिरोज गांधी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 8 सितंबर 1960 को महज 47 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
जब पहली बार लोकसभा में नेहरू परिवार से सिर्फ एक सदस्य
1962 में 494 सीटों के लिए हुए तीसरी लोकसभा चुनाव में जवाहर लाल नेहरू अपने परिवार से संसद पहुंचने वाले अकेले शख्स थे। हालांकि, 27 मई 1964 को प्रधानमंत्री नेहरू का निधन हो गया। उनके निधन के चलते फूलपुर लोकसभा सीट खाली हो गई। इस सीट पर उपचुनाव हुए तो उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित यहां से जीतकर लोकसभा पहुंची और लोकसभा में नेहरू-गांधी परिवार का प्रतिनिधित्व जारी रहा।


