नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए दफ़्तरों के चक्कर काट रहे

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
रायपुर, 03 सितंबर 2026। भाजपा द्वारा प्रचारित बस्तर के कथित विकास मॉडल को स्थानीय बस्तरिया आदिवासियों के विनाश और कॉर्पाेरेट लूट का मॉडल बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि डबल इंजन सरकार बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ’विकास और सुरक्षा’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए दफ़्तरों के चक्कर काट रहे हैं और सरेंडर कर चुके समर्पित नक्सली पुनर्वास नीति के लाभों से वंचित हैं। कल ही महाराष्ट्र के गढ़ चिरौली से मुख्यधारा में लौटे 50 से अधिक पूर्व नक्सलियों को उनके गृह क्षेत्र बस्तर भेजा गया, पुनर्वास योजनाओं के वायदों का कितना लाभ उन्हें प्रदान किया गया यह बताने की स्थिति में सरकार नहीं है। पीड़ित और प्रभावित दर दर भटक रहे हैं, यह सरकार केवल उनके ज़ख्मों की नुमाइश कर रही है। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने 2025 के बस्तर पंडुम के दौरान जगदलपुर के सार्वजनिक मंच से घोषणा किया था कि ’नक्सल मुक्त गाँव’ घोषित प्रत्येक गाँव को विकास कार्यों के लिए पृथक से एक-एक करोड़ रुपये दिया जायेगा, वह सिर्फ कागजी साबित हुआ है। किसी भी गाँव को यह राशि जारी नहीं की गई है। भाजपा सरकार बस्तर के नाम पर केवल झूठे प्रचार का खेल खेल रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि संसाधनों की लूट का विरोध करने वाले निर्दाेष आदिवासियों पर नक्सली सहयोगी होने का ठप्पा लगाकर उन्हें जेलों में ठूँसा गया है, आज जब दुर्दांत नक्सलियों को माफ़ी मिल गई फिर उन हजारों आदिवासियों की रिहाई क्यों नहीं हो रही है जिन पर सहयोगी होने का आरोप है? सुरक्षा के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है और बस्तर के जल-जंगल-जमीन को उद्योगपतियों के हवाले करके कॉर्पाेरेट लूट को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे अमीर-गरीब के बीच असमानता खाई की तरह बढ़ रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ’विश्वास, विकास और सुरक्षा’ की नीति पर काम करते हुए निर्दाेष आदिवासियों की रिहाई के लिए जस्टिस पटनायक समिति बनाई थी, वनोपजों की कीमत और संग्रहण की मात्रा बढ़ाकर आदिवासियों की समृद्धि और बस्तर के संसाधनों की रक्षा की। भाजपा शासन में आदिवासियों का यही भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार का असली मक़सद बस्तर में शांति नहीं, जल-जंगल-जमीन को खाली कराकर कॉरपोरेट घरानों को सौंपना है। नंदराज पर्वत ग्रामसभा की फर्जी एनओसी लगाकर अडानी को सौंप, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल, की खदाने आर्सेलर मित्तल को लुटाये, कांकेर के हाहालदी सागर स्टोन को दे दिया गया बीजापुर और नारायणपुर के जंगल भी उजाड़े जा रहे हैं, शबरी, डंकनी शंखनी और इंद्रावती नदियों का पानी और बहुमूल्य खनिज संसाधनों को उद्योगपतियों और अपने चंद पूंजीपति मित्रों की तिजौरी भरने कुर्बान किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार के लिए विकास के मायने केवल मोदी के पूंजीपति मित्रों का मुनाफा है और इसके लिए प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय बस्तरिया आदिवासियों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है, विनाश को विकास मॉडल बताने फर्जी दावें और भ्रामक विज्ञापनों पर लोकधन का अपव्यय किया जा रहा है।


