
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
रायपुर, 30 अगस्त 2026। बिजली के निजीकरण की तैयारी जनता के साथ विश्वासघात है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने बिजली के दाम बढ़ाकर, 400 यूनिट तक मिलने वाली राहत को खत्म कर और स्मार्ट मीटर के नाम पर आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के बाद अब बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। जनता के खून-पसीने की कमाई से खड़ी की गई बिजली कंपनी को बेचने और निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई का ठेका देने की सरकार की तैयारी छत्तीसगढ़ की जनता के हितों के साथ सीधा विश्वासघात है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पहले मंत्रिमंडल में विद्युत कंपनी के शेयर बेचने का फैसला लिया गया और अब निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का ठेका देने की तैयारी की जा रही है। जब सरकारी बिजली कंपनी प्रदेश की जनता को बिजली उपलब्ध करा रही है तो उसे कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? कांग्रेस स्पष्ट रूप से कहना चाहती है कि हर परिवार, किसान, मजदूर और छोटे व्यवसाय की बुनियादी जरूरत है। बिजली व्यवस्था का निजीकरण हुआ तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और भविष्य में बिजली के दाम बढ़ने का रास्ता और आसान हो जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार पहले ही बिजली के दाम बढ़ा चुकी है। 400 यूनिट तक मिलने वाली राहत को खत्म किया जा चुका है। स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। अब सरकारी बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता जनता को सस्ती बिजली देना नहीं, बल्कि निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाना है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है। हम सरकार से मांग करते हैं कि विद्युत कंपनी के शेयर बेचने और निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई का ठेका देने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था जनता की संपत्ति है, किसी निजी कंपनी की कमाई का जरिया नहीं। कांग्रेस जनता की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेगी। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि बिजली व्यवस्था के निजीकरण से किसे फायदा होगा और इसकी कीमत छत्तीसगढ़ की जनता क्यों चुकाए?


