
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 11 मई 2026। विधानसभा चुनावों के नतीजों ने इंडिया गठबंधन की दिशा व दशा दोनों पर असर डालना शुरू कर दिया है। आपसी मतभेद सतह पर आ रहे हैं, तो नए रिश्ते बन और बिगड़ भी रहे हैं। भाजपा के बढ़ते असर से पुराने क्षेत्रीय दलों का आधार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में कांग्रेस सत्ताधारी टीवीके को इंडिया गठबंधन में लाने की कोशिश में है।
इंडिया गठबंधन पर पड़ेगा असर
द्रमुक कांग्रेस के अचानक टीवीके के साथ जाने से बेहद नाराज है। उधर कांग्रेस टीवीके साथ आने वाले निकाय चुनाव ही नहीं, 2029 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन करने की रणनीति बना रही है। द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन ने शनिवार को टीवीके का साथ देने वाले गैर कांग्रेसी छोटे दलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक ही दिन में द्रमुक के साथ अपने संबंध तोड़ लिए। इस बीच वामपंथी दल इंडिया गठबंधन में द्रमुक को बनाए रखना चाहते हैं। पर कोई हैरत नहीं कि आगे द्रमुक भाजपा के नजदीक जाते दिखे। पहले भी द्रमुक एनडीए में रह चुकी है।
यूपी में विपक्षी एकता की परख
बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार फिर भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता की बात करने लगी हैं। कांग्रेस व तृणमूल के तल्ख रिश्ते अब ठीक होते दिखते हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव कांग्रेस को लेकर सशंकित हैं। उन्होंने इसका संकेत दे दिया है। वह द्रमुक का साथ छोड़ने से कांग्रेस पर तंज भी कर रहे हैं। सपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।
क्या द्रमुक की राह पर विजय सरकार?
कांग्रेस के सहारे सीएम बने विजय को तय करना है कि भाजपा के खिलाफ बने मोर्चे में किस तरह की भूमिका निभाना चाहते हैं। टीवीके द्रमुक की तरह केंद्र के खिलाफ सख्त तेवर दिखाते हुए टकराव का रास्ता अपनाएगी या खामोशी से काम करती रहेगी। भाजपा से वैचारिक दुश्मनी बताने वाली टीवीके पर इंडिया गठबंधन में आने व अहम भूमिका निभाने का दबाव भी बन सकता है। उनकी सरकार वैसे भी क्षीण बहुमत पर टिकी है और उस पर किसी भी सहयोगी दल से समर्थन वापसी की तलवार लटकी रहेगी।


