
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
इंफाल 22 अप्रैल 2026। माओवाद प्रभावित राज्यों की तर्ज पर अब मणिपुर में भी उग्रवादी समूहों की घेराबंदी की तैयारी हो रही है। इसके लिए राज्य में तैनात सुरक्षा बल बढ़ाए जाएंगे। सीआरपीएफ को कई बड़े मोर्चों की जिम्मेदारी मिल सकती है। बीएसएफ और असम राइफल के दस्ते सेना के साथ नई भूमिका में दिख सकते हैं। मणिपुर में मौजूद सेना, सीएपीएफ, असम राइफल और पुलिस के बीच समन्वय को बेहतर बनाने व संयुक्त ऑपरेशनों को प्रभावी बनाने की दिशा में नई योजना के तहत काम होगा। म्यांमार से लगते सीमा क्षेत्र में घुसपैठियों पर नकेल कसी जाएगी। ड्रग माफिया पर भी प्रहार होगा। मणिपुर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में 300 से अधिक बुलेटप्रूफ बख्तरबंद गाड़ियां तैनात होंगी। वहीं, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से सीआरपीएफ की कंपनियों को मणिपुर में तैनात किया जाएगा। इसमें सीआरपीएफ की जंगल वॉरफेयर के लिए प्रशिक्षित कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) की यूनिटों को भी मणिपुर में भेजा जा सकता है।
कम दूरी पर एफओबी स्थापित करने की योजना
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तरह मणिपुर में कम दूरी पर फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) स्थापित करने की योजना है। वहां उग्रवादी समूहों की दोतरफा घेराबंदी होगी। एक सीमा क्षेत्र से उग्रवादियों की आपूर्ति शृंखला खत्म की जाएगी। दूसरा आंतरिक क्षेत्रों में एफओबी के जरिये सुरक्षा बल, उग्रवादियों की कमर तोड़ेंगे।
सूत्र बताते हैं कि सुरक्षा बलों की नई रणनीति इस तरह से तैयार की जा रही कि उग्रवादियों को कहीं छिपने की जगह न मिल सके। भारत-म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन तलाशी अभियान चलेगा। सेना और बीएसएफ सीमा क्षेत्र में मोर्चा संभालेगी। सीआरपीएफ, कोबरा, असम राइफल और स्थानीय पुलिस, मणिपुर के भीतरी इलाकों में उग्रवादी समूहों को सरेंडर करने के लिए मजबूर करेगी।


