
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 08 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब दिल्ली के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। पश्चिमी एशिया के देशों से आने वाले सामान की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। युद्ध के कारण पश्चिमी एशिया और खासकर ईरान से आयात और निर्यात होने वाली वस्तुओं पर प्रभाव पड़ सकता है। व्यापारियों के मुताबिक, आयात में देरी, परिवहन खर्च बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने के कारण बाजार में कई उत्पादों की कमी देखने को मिल रही है। दिल्ली के थोक और खुदरा बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कॉस्मेटिक उत्पाद और कुछ खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता कम हो गई है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है और कई दुकानदारों को ग्राहकों को संतुष्ट करना भी मुश्किल हो रहा है।
युद्ध के कारण चावल के दाम गिरे
इजराइल-ईरान युद्ध का असर खासकर बासमती चावल के निर्यात पर इसका गंभीर असर पड़ा है। मध्य पूर्व के बाजार लगभग बंद हो जाने से दिल्ली के नए बाजार से चावल की सप्लाई रुक गई है और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है। दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गुप्ता के मुताबिक, मिडिल ईस्ट का बाजार पिछले कुछ दिनों से लगभग ठप है।
इलेक्ट्रॉनिक सामान की आपूर्ति प्रभावित
राजधानी के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में मोबाइल एक्सेसरीज, कंप्यूटर पार्ट्स और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आपूर्ति धीमी पड़ गई है। व्यापारियों ने कहा कि उत्पादों के कई पुर्जे विदेशों से आयात किए जाते हैं और युद्ध की स्थिति के कारण शिपमेंट समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। व्यापारी ऋषि ने बताया कि पहले जो सामान 10 से 12 दिन में आ जाता था अब उसे आने में 30 दिन या उससे ज्यादा लग रहा है। माल देर से आने और परिवहन खर्च बढ़ने से कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के दाम हाल के दिनों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे बिक्री भी प्रभावित हो रही है।
मशीनों के पुर्जों की कमी
पश्चिमी एशिया में छिड़े युद्ध के कारण मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों के पुर्जों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इन पुर्जों पर दिल्ली और आसपास के इलाकों के कई छोटे उद्योग निर्भर हैं। ओखला औद्योगिक क्षेत्र के व्यापारी प्रवीण शर्मा ने बताया कि कई जरूरी स्पेयर पार्ट्स विदेशों से आते हैं। अभी आयात में देरी हो रही है, जिससे उद्योगों को समय पर सामान नहीं मिल पा रहा। इसका असर उत्पादन और मरम्मत के काम पर पड़ रहा है।


