बस्तर की संस्कृति से रूबरू हुईं राष्ट्रपति मुर्मू, कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने मोहा मन

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

रायपुर 07 फरवरी 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने स्टॉल में बस्तर की संस्कृति, रहन-सहन, वेशभूषा, वाद्ययंत्र, रीति-रिवाज और भाषाशैली को बेहद करीब से देखा। बस्तर के कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने स्टॉल में बस्तर की संस्कृति, रहन-सहन, वेशभूषा, वाद्ययंत्र, रीति-रिवाज और भाषाशैली को बेहद करीब से देखा। बस्तर के कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं। ऐसे में आदिवासी बहुल क्षेत्र बस्तर संभाग में उनका आगमन अहम माना जा रहा है। बस्तर संभाग के आदिवासियों के बीच उनके आगमन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। आदिवासी उन्हें अपने बीच पाकर बेहद उत्साहित हैं। इसे आदिवासी समाज के सम्मान और गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।

बस्तर के आदिवासी इसे केवल राष्ट्रपति का आगमन नहीं, बल्कि अपनी बेटी या बहन के बस्तर आने के रूप में देख रहे हैं। खास बात यह है कि राष्ट्रपति के बस्तर आगमन से बस्तर पंडुम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही बस्तर की आदिवासी संस्कृति को भी व्यापक पहचान मिलेगी।

बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू का छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में यह पहला दौरा है। इससे पहले चार राष्ट्रपति बस्तर आ चुके हैं। 25 से 26 जुलाई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बस्तर आए थे।

क्या है बस्तर पंडुम
राष्ट्रपति मुर्मु आदिवासी संस्कृति के महाकुंभ ‘बस्तर पण्डुम-2026‘ का शनिवार सुबह 11 बजे शुभारंभ करेंगी । नौ फरवरी तक आयोजित इस जनजातीय समाज के तीन दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ में जनजातीय जीवनशैली, मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत सहेजने और प्रदर्शित करने का पर्व है। बस्तर पण्डुम लोककला और संस्कृति और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा उत्सव है। यह उत्सव बस्तर जनजातीय बस्तर पण्डुम जानजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और उनकी समृद्ध परंपरा को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इस उत्सव के माध्यम से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।  

12 विद्याओं का प्रदर्शन
बस्तर अंचल में पण्डुम पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में जनजातीय समाज की जीवनशैली के दर्शन होते है। इस बार पण्डुम पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 12 विधाओं की प्रस्तुति दी जाएगी। युवा कलाकारों के माध्यम से बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा व आभूषण, पूजा पद्धति, बस्तर शिल्प, जनजातीय चित्रकला का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य एवं बस्तर वन औषधि पर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

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