
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
बिलासपुर 12 नवंबर 2025। बढ़ते प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर दिखता है। अस्थमा रोगियों के लिए प्रदूषण में खुद को सुरक्षित रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। वहीं जो लोग धूम्रपान करते हैं, जिनका लाइफस्टाइल हैल्दी नहीं, उन्हें भी लंग्स इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। इस समय भारत में कई जगहों पर एयर क्वालिटी (AQI Level )काफी खराब चल रही है। पटाखों व अन्य कई तरह का जहरीला धुआं फेफड़ों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। फेफड़ों में अगर लगातार गंदगी जमती रहे तो यह आगे चलकर कई तरह की परेशानियां दे सकती हैं इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप समय-समय पर फेफड़ों को डिटॉक्स करते रहें। लंग्स स्ट्रॉग्स होंगे तो वह हर तरह की इंफेक्शन से बचे रहेंगे। इन दिनों फिर से कोरोना के केस सुनने को मिल रहे हैं। इन बढ़ते केसेज में खुद के फेफड़ों को हैल्दी बनाए रखने के लिए कुछ नेचुरल डिटॉक्स नुस्खे फॉलो करते रहें।
फेफड़ों में इंफेक्शन होने के लक्षण
फेफड़ों में इंफेक्शन के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और यह व्यक्ति की उम्र और हैल्थ अपडेट पर निर्भर करता है और यह भी कि संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण हुआ है या नहीं। इंफेक्शन के लक्षण सर्दी खांसी फ्लू जैसे हो सकते हैं जो लंबे समय तक बने रहते हैं। फेफड़ों में संक्रमण होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे जैसे बैक्टीरियल, वायरल या फंगल इन्फेक्शन। इसे सामान्यतः पल्मोनरी इन्फेक्शन या फेफड़ों का संक्रमण कहा जाता है। फेफड़ों का सबसे आम संक्रमण निमोनिया है जो फेफड़ों के ऊतकों में सूजन और इंफेक्शन का कारण बनता है। इसके अलावा, ब्रोंकाइटिस (श्वसन नलिकाओं में सूजन) भी एक प्रकार का फेफड़ों का संक्रमण हो सकता है। जब फेफड़ों से हवा को लाने-ले जाने वाली बड़ी ब्रोन्कियल नलिकाओं में इंफेक्शन होता है तो इसे ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। जब इंफेक्शन होता है तो शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
खांसी
लंग्स इंफेक्शन की चलते खांसी होना सबसे सामान्य लक्षण है। यह सूखी भी हो सकती है और कफ के साथ भी। कभी-कभार खांसी में खून भी आने लगता है जो गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है। अगर खांसी लगातार हो रही हैं और लंबे समय से बनी हुई है तो डाक्टरी जांच अवश्य करवाएं।
बुखार-ठंड लगना और सिरदर्द
इंफेक्शन होने पर बुखार और ठंड के लक्षण भी दिखते हैं। अचानक तेज बुखार होना सामान्य लक्षण है, इसके साथ शरीर में दर्द और ऐंठन भी हो सकती है। फेफड़ों के संक्रमण के कारण सिर में हल्का या तेज दर्द हो सकता है, खासकर जब बुखार के साथ अन्य लक्षण मौजूद होते हैं। शरीर जब संक्रमण से लड़ने की कोशिश करता है तब बुखार होता है।शरीर का सामान्य तापमान आमतौर पर 98.6°F (37°C) के आसपास होता है लेकिन बैक्टीरियल लंग्स इंफेक्शन में बुखार खतरनाक 105°F (40.5°C) तक बढ़ सकता है। 102°F (38.9°C) से ज़्यादा तेज़ बुखार होने पर अक्सर कई अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं, जैसे: पसीना आना, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, कमज़ोरी आदि के लक्षण दिख सकते हैं। अगर बुखार 3 दिन से ज्यादा हो और 102°F (38.9°C) से ज्यादा हो तो लंग्स स्पैशलिस्ट को दिखाना चाहिए।
सीने में दर्द या दबाव
संक्रमण के कारण फेफड़ों में सूजन और जलन हो सकती है, जिससे सीने में दर्द या दबाव महसूस हो सकता है। खांसने या गहरी सांस लेने पर सीने का दर्द और भी बढ़ जाता है। कभी-कभी आपकी पीठ के मध्य से ऊपरी हिस्से में तेज दर्द महसूस हो सकता है।
थकावट और कमजोरी
लंग्स इंफेक्शन के चलते इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे थकावट और कमजोरी महसूस हो सकती है। रोजमर्रा के काम करने में मुश्किल हो सकती है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जैसे बुजुर्ग या बच्चे, उन्हें संक्रमण के गंभीर लक्षण महसूस हो सकते हैं, जैसे उल्टी, मानसिक भ्रम और ब्लड प्रैशर लो होना। त्वचा या होंठों का रंग नीला पड़ सकता है। इस दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठ या नाखून थोड़े नीले रंग के दिखाई देने लग सकते हैं।
उल्टी या मतली
फेफड़ों की इंफेक्शन के कुछ मामलों में उल्टी और मतली जैसा भी हो सकता है। ऐसा शरीर में इंफेक्शन के प्रति रिएक्शन के रुप में होती है। कुछ मामलों में, फेफड़ों के संक्रमण के साथ उल्टी या मतली भी हो सकती है, जो शरीर के संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया के रूप में होती है।
गले में दर्द-सूजन और जलन
फेफड़ों में इंफेक्शन के चलते गले में दर्द, जलन और सूजन भी हो सकती है। ऐसा तब होता है जब बलगम बहुत ज्यादा बन रही हो। कभी-कभी फेफड़ों में संक्रमण के कारण गले में जलन या दर्द भी हो सकता है, खासकर जब बलगम की अधिकता हो। वही ब्रोंकाइटिस या निमोनिया इंफेक्शन के चलते आपको खांसी हो सकती है जिसमें गाढ़ा बलगम निकलता है जिसका रंग सफ़ेद, हरा या पीला भूरा हो सकता है।


