शीतकालीन अवकाश में सुप्रीम कोर्ट की कोई बेंच नहीं, सीजेआई चंद्रचूड़ का बड़ा फैसला

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

नई दिल्ली 16 दिसंबर 2022। इस बार सुप्रीम कोर्ट में शीतकालीन अवकाश के दौरान कोई पीठ तात्कालिक मामलों की सुनवाई के लिए मौजूद नहीं रहेगी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को यह बड़ा एलान किया। शीर्ष अदालत में 17 दिसंबर से 1 जनवरी तक अवकाश रहेगा।सीजेआई चंद्रचूड़ की यह घोषणा अहम मानी जा रही है, क्योंकि केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को ही राज्यसभा में कहा था कि लोगों का मानना है कि अदालतों की लंबी छुट्टियां न्याय चाहने वालों के हित में नहीं हैं। सीजेआई चंद्रचूड़ ने आज सुनवाई शुरू होने के पूर्व अपने कोर्ट रूम में मौजूद वकीलों को सूचित किया कि कल से 1 जनवरी तक कोई बेंच उपलब्ध नहीं होगी। दो सप्ताह के शीतकालीन अवकाश से पहले आज यानी शुक्रवार शीर्ष अदालत का अंतिम कार्य दिवस है। सुप्रीम कोर्ट 2 जनवरी को फिर से खुलेगी।

कॉलेजियम की फाइलों के विवाद के बीच नया मामला
देश की अदालतों में छुट्टियों का मुद्दा पहले भी उठा था। कॉलेजियम की नियुक्ति की फाइलें केंद्र के पास लंबित होने को लेकर केंद्र व सुप्रीम कोर्ट में ताजा तकरार के बीच यह मामला नए सिर से उठा हैं। इससे पहले तक अवकाश के दिनों में भी सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला कोर्ट तक आपात मामलों की सुनवाई के लिए एक दो अवकाशकालीन पीठ मौजूद रहती हैं। 

जज आराम में नहीं रहते : जस्टिस रमण
अदालतों की छुट्टियों पर पूर्व में हुई बहस के बीच पूर्व सीजेआई एनवी रमण ने कहा था कि यह गलत धारणा है कि जज बेहद आराम में रहते हैं और वे अपनी छुट्टियों का आनंद लेते हैं। इसी साल जुलाई में रांची में ‘लाइफ ऑफ ए जज’ विषय पर जस्टिस एसबी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर देते हुए तत्कालीन सीजेआई रमण ने कहा था कि जजों की रातों की नींद उड़ जाती है और वे अपने फैसलों पर पुनर्विचार करते हैं। 
जस्टिस रमण ने कहा था कि लोगों के मन में यह गलत धारणा है कि जज आराम में रहते हैं और केवल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक काम करते हैं और छुट्टियों का मजा लेते हैं। ये बाते झूठी हैं। जजों को ये बातें गले नहीं उतरती हैं। जस्टिस रमण ने कहा था कि फैसलों के प्रभावों को देखते हुए न्याय करने की जिम्मेदारी बेहद बोझिल है। हम छुट्टियों के दौरान भी फैसलों पर शोध करते हैं। इस प्रक्रिया में हम जीवन की खुशियां खो देते हैं।

कॉलेजियम बना तकरार का मुद्दा 
बता दें, जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच तकरार का मुद्दा बन गया है। ‘जजों द्वारा जजों की नियुक्ति’ के इस प्रणाली की विभिन्न क्षेत्रों द्वारा आलोचना की जा रही है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने 25 नवंबर को इसे लेकर कहा था कि कॉलेजियम प्रणाली संविधान के लिए बाहरी है। केंद्र के पास जजों की नियुक्तियों की कॉलेजियम की कई सिफारिशें लंबित हैं। शीर्ष कोर्ट ने हाल ही में इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इस रवैये को उसके फैसलों की अवमानना जैसा बताया था। 

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