हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे महीने कण गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली, 04 नवंबर 2026। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर फिर से चिंता बढ़ गई है। पिछले दो-तीन दिनों से ज्यादातर हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 के आंकड़े को भी पार कर गया है, इस स्तर के प्रदूषण को सेहत के लिए गंभीर खतरे वाला माना जाता है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे महीने कणों के साथ ब्लैक कार्बन सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए प्रदूषित हवा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। परेशानी की बात यह है कि कई बार प्रदूषण का असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों, दिल और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
चूंकि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर लगातार स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं, ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि कैसे पता किया जाए कि कहीं आप इसकी चपेट में तो नहीं आ गए हैं? श्वसन रोग विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण बढ़ने और प्रदूषित हवा में सांस लेने से कुछ लोगों को खांसी, आंखों में जलन और सांस फूलने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। बच्चे-बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा खतरा होता है, जिसे लेकर विशेषज्ञ लगातार अलर्ट करते रहे हैं। प्रदूषण का आंखों से लेकर श्वसन तंत्र और गंभीर मामलों में हार्ट-लंग्स पर भी असर हो सकता है।
सांस फूलने से लेकर सिरदर्द की समस्या
प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर हमारे श्वसन तंत्र से जुड़े अंगों पर पड़ता है। पीएम 2.5 जैसे बेहद छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाते हैं। इससे सूखी खांसी, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा के मरीजों में अटैक बढ़ने का खतरा रहता है।
- इसी तरह से प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से कुछ लोगों को सिरदर्द और थकान महसूस हो सकती है।
- लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क से रक्त वाहिकाओं में सूजन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
बच्चों-बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं वैसे तो प्रदूषण सभी लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक है, पर बच्चों-बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा देखा जाता रहा है। पहले से ही अस्थमा, सीओपीडी, हार्ट के मरीजों को भी प्रदूषण से ज्यादा खतरा रहता है। बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए प्रदूषण उनके सांस संबंधी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एक्यूआई ज्यादा होने पर बाहर एक्सरसाइज करने से बचें और घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें। घर में धुआं और धूल आने से रोकें और हेपा फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें। सांस लेने में ज्यादा परेशानी, सीने में दर्द या गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

