सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कानून पर विचार करने की जरूरत

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली, 04 नवंबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि स्थानीय निकायों के चुनावों में दो से अधिक बच्चे वाले लोगों को अयोग्य ठहराने वाले कानून अब अप्रासंगिक हो गए हैं। कोर्ट ने कहा कि भारत में घटती प्रजनन दर और जनसांख्यिकीय बदलावों को देखते हुए, ऐसे प्रतिबंधों के पीछे का तर्क अब खत्म हो चुका है।
इस टिप्पणी के साथ, कोर्ट ने ‘जावेद बनाम हरियाणा राज्य’ (2003) के मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। उस मामले में तीन जजों की बेंच ने ‘हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994’ की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जिसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर उम्मीदवारों को स्थानीय चुनावों में लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
महाराष्ट्र के पूर्व सरपंच को मिली राहत
अदालत ने कहा कि दो से अधिक बच्चे होने पर लोगों को अयोग्य ठहराने वाले कानूनों पर फिर से विचार करने की जरूरत है, खासकर भारत में घटती प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) को देखते हुए। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत ककोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव पर उनके तीसरे बच्चे के जन्म के कारण लगाई गई अयोग्यता को भी रद्द कर दिया। 1959 के इस अधिनियम में 13 सितंबर, 2000 से दो से अधिक बच्चे होने पर रोक (कैप) लगा दी गई थी।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2003 में तीन थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने ‘जावेद बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में ‘दो बच्चों के नियम’ की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जो अब घटकर 1.9 रह गई है।
अदालत ने गौर किया कि प्रजनन दर में यह गिरावट, जो अब 2.1 के ‘रिप्लेसमेंट स्तर’ से भी नीचे आ गई है, जल्द ही एक ऐसे जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक ट्रांजिशन) की ओर ले जाएगी, जिसमें आबादी की उम्र बढ़ेगी और कामकाजी उम्र के लोगों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
कितने राज्यों में दो बच्चों के नियम खत्म हुए?
बोबडे द्वारा पेश की गई जानकारी के अनुसार, सात राज्यों ने ‘दो बच्चों के नियम’ को खत्म कर दिया है, जबकि पंद्रह राज्यों में ऐसी कोई नीति नहीं है। संक्षेप में कहें तो, सभी राज्यों में इसे लेकर कोई एक समान नीति नहीं है। जिन राज्यों में अभी भी ‘दो बच्चों का नियम’ लागू है, उनमें असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड शामिल हैं।


