नालंदा में दो दिन होगा ज्ञान परंपरा का मंथन

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर          

नालंदा, 20 सितंबर 2026। ऐतिहासिक ज्ञान स्थली राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में 21 और 22 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन होने जा रहा है। ‘विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस समागम में देशभर के प्रमुख शिक्षाविद्, शोधकर्ता और चिंतक विचार-मंथन करेंगे। यह आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

परिसंवाद का औपचारिक उद्घाटन
21 सितंबर को सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय के ‘विश्वमित्रालय’ सभागृह में परिसंवाद का औपचारिक उद्घाटन होगा। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन होंगे। कार्यक्रम में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी विषय प्रवर्तन करेंगे, जबकि प्रतिष्ठित शिक्षाविद् प्रो. रमेश भारद्वाज परिसंवाद की प्रस्तावना रखेंगे। वहीं, यूजीसी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी सत्र में सारस्वत उद्बोधन देंगे।

‘नालंदा-बोध’ पर होगा विशेष व्याख्यान
उद्घाटन सत्र के ठीक बाद एक विशेष बौद्धिक सत्र का आयोजन होगा, जिसमें डॉ. अतुल कोठारी ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और नालंदा-बोध’ विषय पर अपना विशेष व्याख्यान देंगे।

पुरातन ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के समन्वय पर मंथन
दो दिनों तक चलने वाले इस परिसंवाद में भारतीय ज्ञान संपदा को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और शोध से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। विमर्श के केंद्र में भारतीय भाषाओं को शोध एवं ज्ञान-सृजन की सक्रिय भाषा बनाना, प्राचीन ग्रंथों का डिजिटलीकरण व अनुवाद, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामाजिक समावेशन जैसे समकालीन विषय शामिल रहेंगे। इसके साथ ही वेद, उपनिषद, दर्शन, बौद्ध तर्कशास्त्र, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, स्थापत्य, कृषि और जल-प्रबंधन जैसी विधाओं की वर्तमान उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार, प्राचीन नालंदा की संवाद और शोध की वैश्विक विरासत को आधुनिक संदर्भों में पुनर्जीवित करना और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को मानवीय मूल्यों व नवाचार के साथ गति देना ही इस राष्ट्रीय परिसंवाद का प्रमुख ध्येय है। 

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