
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026। 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी और सावन सोमवार का खास संयोग बन रहा है। सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। दोनों पर्व एक ही दिन होने के कारण इस दिन शिव पूजा और नाग देवता की आराधना का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने और सावन सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से सुख-शांति, परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य कर सकते हैं।
इस समय करें नाग पंचमी की पूजा
नाग पंचमी की पूजा के लिए 17 अगस्त की सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक पूजा का शुभ समय रहेगा। हालांकि, शहर के अनुसार सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में कुछ बदलाव हो सकता है।
नाग पंचमी और सावन सोमवार का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में नाग देवता को पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नाग का विराजमान होना भी नाग पूजा और शिव आराधना के संबंध को दर्शाता है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा इसी धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। वहीं सावन के सोमवार को भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेलपत्र अर्पित करने और भगवान शिव का ध्यान करने से मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।
कालसर्प दोष से भी जुड़ी हैं मान्यताएं
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को राहु-केतु और नाग से संबंधित दोषों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से कई लोग इस दिन नाग देवता की पूजा और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष या किसी अन्य ग्रह दोष का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए व्यक्तिगत जन्मकुंडली का अध्ययन जरूरी होता है। केवल पर्व विशेष पर की जाने वाली सामान्य पूजा को किसी व्यक्ति की कुंडली का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।

