चंद्रशेखरन के बाद उत्तराधिकार पर टिकी बाजार की नजर

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

मुंबई, 13 अगस्त 2026। टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने और अपनी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए बोर्ड के समक्ष न भेजने का फैसला किया है। इस निर्णय के सामने आने के बाद टाटा समूह के शेयरों पर इसका तात्कालिक असर देखने को मिला है। भारतीय उद्योग जगत और निवेशकों के बीच अब इस बात को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गई है कि देश के इस सबसे बड़े औद्योगिक घराने का उत्तराधिकारी कौन होगा। हालांकि, बाजार के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस इस्तीफे से टाटा समूह के शेयरों पर दीर्घकालिक रूप से कोई विशेष नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन अल्पावधि में कुछ दबाव अवश्य देखा जा सकता है। चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे, जिससे समूह को सुचारू रूप से कार्यभार सौंपने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

इस्तीफे के पीछे का गतिरोध क्या?

नटराजन चंद्रशेखरन ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में खुलासा किया कि उनका यह फैसला अचानक नहीं आया है, बल्कि यह निर्णय कई महीनों से बोर्ड के भीतर चल रहे गतिरोध का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड के निदेशकों में से एक उनके कार्यकाल के विस्तार का समर्थन नहीं कर रहा था, जिसके चलते उन्होंने अपनी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को बोर्ड में न भेजने का फैसला किया।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?

साल 2017 में टाटा समूह की बागडोर संभालने के बाद से एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने वित्तीय मोर्चे पर बेहतरीन उपलब्धियां हासिल की हैं:

  • बाजार मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि: उनके कार्यकाल के दौरान टाटा समूह का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 3.3 गुना बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
  • प्रदर्शन में विविधता: विशेषज्ञ किशोर ओस्तवाल के अनुसार, समूह की कई कंपनियां वर्तमान में बेहद शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि कुछ अन्य कंपनियों का प्रदर्शन काफी सीमित रहा है।
  • प्रमुख व्यवसायों पर दबाव: ‘दी वेल्थ’ के संस्थापक और सीईओ प्रशांत सिंह का कहना है कि समूह के कुछ बड़े कारोबारी उपक्रमों जैसे एयर इंडिया, टीसीएस और टाटा स्टील पर दबाव बढ़ रहा है।

इस्तीफे के बाद विश्लेषकों का क्या है आकलन?

इस बड़े कॉरपोरेट घटनाक्रम पर बाजार विश्लेषकों की राय बंटी हुई नहीं है, बल्कि वे इसे एक अस्थायी प्रभाव के रूप में देख रहे हैं:

  • संस्थागत स्थिरता: इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और अनुसंधान प्रमुख जी चोक्कलिंगम ने कहा कि टाटा समूह के प्रत्येक व्यवसाय की अपनी स्वतंत्र कार्यप्रणाली और एक अत्यधिक योग्य नेतृत्व टीम है, जो कंपनियों को कठिन समय में भी स्थिरता प्रदान करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखरन के नेतृत्व में सभी कंपनियां असाधारण प्रदर्शन नहीं कर रही थीं। टीसीएस, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स जैसी कंपनियां पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही हैं, इसलिए शेयरों पर दबाव केवल अल्पावधि के लिए ही रहेगा।
  • लार्ज-कैप शेयरों पर असर: जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर का आकलन है कि इस इस्तीफे से टाटा समूह के शेयरों पर थोड़ा दबाव बढ़ सकता है, जिससे व्यापक बाजार की तुलना में लार्ज-कैप शेयरों का प्रदर्शन कुछ समय के लिए कमजोर रह सकता है।
  • निवेशकों की चिंता: प्रशांत सिंह के मुताबिक, फरवरी 2027 में चंद्रशेखरन के हटने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती, लेकिन बाजार की वास्तविक नजर इस बात पर होगी कि उनका उत्तराधिकारी कौन बनता है।
  • कैसे होगा नए चेयरमैन का चयन?
  • टाटा संस के नियमों के मुताबिक, अगले चेयरमैन के चयन में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका सर्वोपरि होगी, जिसके पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत की नियंत्रण हिस्सेदारी है। टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुच्छेद 118 के तहत, जब तक टाटा चैरिटेबल ट्रस्ट्स के पास आवश्यक हिस्सेदारी बनी रहेगी, तब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए एक विशेष चयन समिति का गठन करना अनिवार्य होगा।
  • आगे की राह क्या?
  • फिलहाल बाजार और निवेशकों की पूरी नजर आगामी 18 अगस्त 2026 को होने वाली टाटा समूह की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) पर टिकी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में होने वाले फैसले और उत्तराधिकार की प्रक्रिया के स्पष्ट होने के बाद ही बाजार में कोई वास्तविक प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। यद्यपि नेतृत्व परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है, लेकिन मजबूत संस्थागत ढांचा समूह की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।

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