
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
चेन्नई 15 मई 2026। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन धर्म’ को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। तमिलागा वेत्री कझगम (टीवीके) के महासचिव और तमिलनाडु सरकार में मंत्री आधव अर्जुन ने डीएमके नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उदयनिधि को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हिंदुओं के खिलाफ नहीं है, बल्कि ‘हिंदुत्व की राजनीति’ के खिलाफ है।
‘उदयनिधि को शायद सनातन धर्म की पूरी समझ नहीं’
आधव अर्जुन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उदयनिधि स्टालिन को खुद शायद सनातन धर्म की पूरी समझ नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उनके मुताबिक उत्तर भारत में सनातन धर्म को हिंदू धर्म के रूप में देखा जाता है, लेकिन तमिलनाडु के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में इसे ‘असमानता’ से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने कहा, ‘हम हिंदुओं के खिलाफ नहीं हैं। हम हिंदुत्व के खिलाफ हैं। हिंदुत्व का मतलब एक धर्म को दूसरों पर थोपना नहीं होना चाहिए। तमिलनाडु में सभी धर्मों के लोगों को बराबरी से सम्मान दिया जाता है। मैं व्यक्तिगत रूप से भगवान में विश्वास नहीं करता, लेकिन मंत्री होने के नाते मुझे सभी धर्मों का सम्मान करना पड़ता है।’
‘सनातन धर्म के किस पहलू का विरोध कर रहे हैं उदयनिधि’
आधव अर्जुन ने यह भी कहा कि उदयनिधि स्टालिन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह वास्तव में सनातन धर्म के किस पहलू का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि सामाजिक असमानता के खिलाफ है। दरअसल, यह विवाद उस समय फिर बढ़ गया जब उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में कहा कि ‘जो सनातन व्यवस्था लोगों को बांटती है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए।’
उदयनिधि के बयान पर भाजपा ने साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने उदयनिधि पर हमला बोलते हुए कहा कि वह ‘तमिलनाडु के राहुल गांधी’ बन गए हैं और समाज को बांटने वाली राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके लगातार हिंदू भावनाओं का अपमान करती रही है। केसवन ने कहा कि तमिलनाडु के लोग ऐसे बयानों को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले भी उदयनिधि के सनातन धर्म पर दिए गए बयानों की देशभर में आलोचना हो चुकी है और अदालतों ने भी इस पर नाराजगी जताई थी।
डीएमके पर चुनावी हार को लेकर बोला हमला
इसी बीच, आधव अर्जुन ने डीएमके पर चुनावी हार को लेकर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि अभिनेता से नेता बने विजय के सिर्फ 10 दिन के चुनाव प्रचार ने ही जनता को डीएमके के खिलाफ कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर विजय ने छह महीने तक प्रचार किया होता तो डीएमके पांच सीटें भी नहीं जीत पाती। विल्लिवक्कम में आयोजित धन्यवाद सभा में बोलते हुए आधव अर्जुन ने कहा कि डीएमके नेतृत्व ने पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों का सम्मान नहीं किया। उन्होंने उदयनिधि स्टालिन और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर पार्टी और सरकार दोनों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
विजय को सीएम बनने से रोकने की कोशिश की गई- आधव
उन्होंने कहा कि जहां कनिमोझी विचारधारा की राजनीति करती हैं, वहीं उदयनिधि का राजनीतिक तरीका अलग है। आधव अर्जुन ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके के अंदर घोड़ा-व्यापार जैसी राजनीति हुई और विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने की कोशिश की गई। विजय की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता ने उन्हें उसी तरह स्वीकार किया है जैसे कभी सी.एन. अन्नादुरै, एमजी रामचंद्रन और जे. जयललिता को किया था। उन्होंने दावा किया कि जनता ने उन नेताओं को सबक सिखाया जो लोगों के प्रति ईमानदार नहीं रहे।
गौरतलब है कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 234 में से 108 सीटें जीतीं। हालांकि पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल जैसे दलों के समर्थन से सरकार बनाने में सफलता मिली। वहीं, राज्य की दोनों पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां डीएमके और एआईएडीएमके सत्ता से बाहर हो गईं।


