सेना के शौर्य को सलाम…,विजय दिवस पर राष्ट्रपति, पीएम मोदी समेत कृतज्ञ राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 16 दिसंबर 2025। विजय दिवस भारत के इतिहास का सबसे गौरवशाली दिन है। यह दिन भारतीय सेना के शौर्य, साहस और बलिदान की याद दिलाता है। आज से 54 साल पहले आज के दिन ही भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी और पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराया था। इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक जीत के साथ न केवल बांग्लादेश का जन्म हुआ, बल्कि भारत ने दुनिया को अपनी सैन्य ताकत और राष्ट्रहित के प्रति संकल्प का संदेश भी दिया। विजय दिवस के अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी, द्रौपदी मुर्मू समेत कई नेताओं ने भारतीय सशस्त्र बलों के योगदान को याद किया। 

पीएम मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों के बलिदान को किया याद
मंगलवार को विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को याद किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि 1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने अद्भुत साहस दिखाकर देश को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। उन्होंने कहा कि विजय दिवस पर हम उन वीर सैनिकों को याद करते हैं, जिनके साहस और बलिदान से भारत को 1971 में ऐतिहासिक जीत मिली। उनकी निष्ठा और निस्वार्थ सेवा ने देश की रक्षा की और इतिहास में गर्व का पल दर्ज किया। उन्होंने आगे कहा कि यह दिन सेना के शौर्य को सलाम करने का दिन है और उनके अदम्य साहस की याद दिलाता है। सैनिकों की वीरता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सैनिकों को दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मंगलवार को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत को विजय दिलाने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की ‘स्थानीयकरण के जरिए सशक्तिकरण’ योजना भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में मुर्मू ने लिखा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सेना ने आत्मनिर्भरता, रणनीतिक संकल्प और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रभावी उपयोग दिखाया, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि विजय दिवस के अवसर पर मैं मातृभूमि के वीर सपूतों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। उनके साहस, शौर्य और निस्वार्थ सेवा ने देश को गर्व से भर दिया है। उनकी वीरता और देशभक्ति हमेशा देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी।

कैसे 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने डाले थे हथियार?
गौरतलब है कि आज का दिन भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। इस युद्ध में पाकिस्तान के करीब 93 हजार सैनिकों ने अपने हथियार डाल दिए थे। पाकिस्तानी सेना का नेतृत्व जनरल एए खान नियाजी कर रहे थे। यह आत्मसमर्पण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया के सबसे बड़े सैन्य आत्मसमर्पणों में से एक माना जाता है। इतना ही नहीं विजय दिवस भारत की सैन्य ताकत, साहस और बलिदान का प्रतीक है।

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