15 दिन बाद भी किसानों को धान बेचने परेशान होना पड़ रहा है – कांग्रेस

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

रायपुर 01 दिसंबर 2025। धान खरीदी को शुरू हुए 15 दिन हो गये लेकिन सरकार अभी तक खरीदी की व्यवस्था नहीं बना पाई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सोसायटी में फैली अव्यवस्था के कारण किसान पंजीयन के लिए भटक रहे है, लोगों का टोकन नहीं कट रहा है। किसान रोज सोसायटी जाकर घूम कर वापस आ जा रहे है। धान खरीदी को लेकर सरकार की नीयत में खोट दिख रहा है। न समय पर किसानों को टोकन मिल रहा है और न ही पूरे रकबे के हिसाब से तौलाई हो रही है, गिरदावरी और अनावरी रिपोर्ट का हवाला देकर कम धान खरीदा जा रहा है। सरकार घोषित नीति प्रति एकड़ 21 क्विंटल के हिसाब से खरीदी नहीं कर रही किसी भी सोसायटी में 16 से लेकर 19 क्विंटल से अधिक की खरीदी नहीं हो रही। धान बेचने के लिए किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहा। बहुत से किसानों का आज भी धान बेचने के लिए एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं हो  पाया है वे भटक रहे। डबल इंजन की सरकार किसानों का पूरा धान 3100 रु. के भाव से नहीं खरीदना चाहती इसलिए जानबूझकर परेशानी पैदा की जा रही।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला 
ने कहा कि एग्रीस्टेक पोर्टल में 2023 के बाद खातो में परिवर्तन एवं बंटवारा, फौती का डाटा नहीं डाला गया है जिसके कारण भी बहुत से किसानों का आज तक पंजीयन नहीं हुआ। इसके साथ ही समिति के कम्प्यूटर में एग्रीस्टेक पोर्टल का पूरा डाटा नहीं चढ़ा है। पोर्टल और सोसायटी के डाटा में मिलान नहीं हो पा रहा है। किसान जब टोकन कटाने जा रहा तब उसे बताया जा रहा कि आपका पूरा डाटा नहीं, उनको टोकन नहीं मिला रहा है। जब एग्रीस्टेक पोर्टल में सोसायटी के कम्प्यूटर में डाटा अपडेट होना था तब सोसायटी के कम्प्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर थे, इस कारण किसान परेशान हो रहे है। सरकार धान खरीदी की व्यवस्था को प्राथमिकता से सुधार करे।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि किसानों का पूरा धान तैयार है, लेकिन रिकार्ड में जमीन कम दिखाने से किसान अपना पूरा धान बेच नहीं पा रहे हैं, सरकार और प्रशासन की गलती से सीधा नुकसान किसानों को हो रहा है। तहसील ऑफिस, राजस्व कार्यालय, जिला कलेक्टर से लेकर मंत्री विधायकों तक किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं है, इस सरकार में समाधान के लिए कोई समय सीमा निश्चित नहीं की गई है, त्रुटिपूर्ण गिरदावरी नहीं बल्कि किसानों के अधिकार से खिलवाड़ है, गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए लेकिन इस सरकार में कहीं दिख नहीं रहा है। प्रशासन के रवैए से स्पष्ट है कि यह सरकार किसानों से पूरा धान नहीं खरीदना चाहती है।

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