
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
काेलकाता 02 अगस्त 2025। पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्यभर की सियासत में गर्महाट है। हालांकि इस गर्माहट का एक और बड़ा कारण मतदाता चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तेज हो रही अटकलें भी है। ऐसे में जब इस मामले में चर्चा तेज हो रही है। तो आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी सिलसिले में एसआईआर को माकपा के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उनकी पार्टी और सभी विपक्षी दल इस प्रक्रिया के खिलाफ हैं और यदि इसे लागू किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
एसआईआर भाजपा और आरएसएस की साजिश
मोहम्मद सलीम ने कहा कि यह भाजपा और आरएसएस की समाज को बांटने की साजिश है। यह दूसरों को अलग-थलग करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्ग आदिवासी, मुस्लिम, अनुसूचित जाति और गरीब लोगों को, खासकर जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें मतदाता सूची से बाहर किया जा सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत ममता बनर्जी की पुरानी राजनीतिक भूमिका से हुई है। सलीम ने कहा कि जब ममता बनर्जी एनडीए का हिस्सा थीं, तब उन्होंने लोकसभा में बंगाल की वोटर लिस्ट को स्पीकर की कुर्सी पर फेंक दिया था और आरोप लगाया था कि इसमें बांग्लादेशी वोटर शामिल हैं। उन्होंने तब कहा था कि जब तक वोटर लिस्ट शुद्ध नहीं की जाती, वह चुनाव नहीं होने देंगी।
चुनाव आयोग पर भी लगाए गंभीर आरोप
सलीम ने आगे आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ईसीआई) ने महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और खासकर मुर्शिदाबाद में चुनावों के दौरान भ्रष्ट तरीके अपनाए, जिससे सत्तारूढ़ दलों को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष ने इन गड़बड़ियों के खिलाफ चुनाव आयोग से सवाल उठाए, तो ममता बनर्जी ने जनवरी में एक बार फिर मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा दिए, जिससे चुनाव आयोग को एसआईआर शुरू करने का बहाना मिल गया। उन्होंने कहा कि हम इस प्रक्रिया को हर हाल में रोकेंगे।
मालेगांव ब्लास्ट केस पर सलीम बोले- जांच एजेंसियों ने निभाई सरकारी भूमिका
वहीं दूसरी ओर मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने पर मोहम्मद सलीम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कोई बरी होना नहीं है। हमने इस पर पहले ही बयान जारी किया है। असल में पुलिस, जांच एजेंसियां, एनआईए और सरकारी वकील सबूत ही पेश नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि आपको याद होगा पहले क्या हुआ था और कैसे भाजपा और केंद्र सरकार ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की रिहाई के लिए पूरा जोर लगा दिया था। उन्होंने कहा कि मैं अदालत को दोष नहीं दे रहा, लेकिन यह जिम्मेदारी जांच अधिकारियों और अभियोजन पक्ष की थी, और उन्होंने पूरी तरह से विफलता दिखाई है। मोहम्मद सलीम ने इसे राजनीतिक दबाव में की गई जांच बताया और कहा कि सरकार ने आरोपियों को बचाने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी।


