बड़े पर्दे पर लौट रही है शाह बानो केस की कहानी

शेयर करे

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर /(अनिल बेदाग)

मुंबई 24 अप्रैल 2025। यूनिफॉर्म सिविल कोड। वक्फ बोर्ड। तीन तलाक। शाह बानो। ये सिर्फ सुर्खियाँ नहीं हैं — ये उन गूंजों की याद दिलाते हैं जो भारत के सबसे तीखे न्यायिक मुकदमों में से एक से निकलीं। एक ऐसा मामला जिसने जनमत को बांट दिया, देश की धर्मनिरपेक्षता की कसौटी ली, और बराबरी बनाम पहचान की बहस को नई चिंगारी दी, एक बहस जो आज भी जारी है। और अब, 40 साल बाद, ये कहानी लौट रही है इस बार, बड़े पर्दे पर। खबरों के मुताबिक, शाह बानो केस और इसी जैसे अन्य मामलों से प्रेरित एक दमदार फीचर फिल्म पर काम चल रहा है, जिसका निर्देशन सुपर्ण वर्मा कर रहे हैं। यामी गौतम और इमरान हाशमी इस फिल्म के मुख्य कलाकार हैं, और सूत्रों के अनुसार फिल्म की शूटिंग हाल ही में लखनऊ में पूरी हुई है। यह फिल्म यामी की “आर्टिकल 370” के बाद अगली बड़ी सिनेमाई रिलीज़ मानी जा रही है, जो उन कानूनी लड़ाइयों की इंसानी कीमत को सामने लाएगी जो राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन जाती हैं। 1978 में, 62 वर्षीय शाह बानो-पांच बच्चों की माँ — ने अपने वकील पति मोहम्मद अहमद खान द्वारा तीन तलाक दिए जाने के बाद, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत सुप्रीम कोर्ट में गुज़ारा भत्ते की याचिका दायर की। उनके पति ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देकर तीन महीने के बाद किसी भी तरह का गुज़ारा भत्ता देने से इनकार कर दिया।

सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि धारा 125 सभी नागरिकों पर लागू होती है, और तलाकशुदा महिलाओं को, चाहे वे किसी भी धर्म की हों, गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार है — यह फैसला लैंगिक न्याय और संवैधानिक समानता की दिशा में एक मील का पत्थर था।

लेकिन इस फैसले के बाद कट्टरपंथी समूहों की तीखी प्रतिक्रिया हुई, और राजीव गांधी सरकार ने 1986 में मुस्लिम महिला (विवाह विच्छेद पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम पास किया, जिसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया। इस प्रकरण ने वोट बैंक की राजनीति, समान नागरिक संहिता और धर्मनिरपेक्षता पर फिर से बहस को जन्म दिया। बहस जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जैसे नेता आज भी शाह बानो मामले को यूनिफॉर्म सिविल कोड और कानूनी सुधारों की बहस का निर्णायक मोड़ मानते हैं।

कभी शाह बानो की आवाज सुप्रीम कोर्ट की दीवारों में गूंजी थी। आज चार दशक बाद, वो आवाज़ लौट रही है और भी बुलंद, और भी साहसी इस बार सिनेमा के माध्यम से।

Leave a Reply

Next Post

मुंबई के एफएबी शो 2025 में टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर के विकास को तेज़ करने की पहल

शेयर करे छत्तीसगढ़ रिपोर्टर /(अनिल बेदाग) मुंबई 24 अप्रैल 2025। टेक्सटाइल्स  और अपैरल सेक्टर में विकास को तेज़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के साथ मुंबई में चल रहे एफएबी शो 2025 के दौरान माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव […]

You May Like

'कुछ लोग निराशावादी ही हैं, भारत को नीचा दिखाना चाहते हैं', पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर बोला हमला....|....दिल्ली होटल अग्निकांड: 21 मौतों के मामले में होटल का रसोइया गिरफ्तार, मालिक के खिलाफ भी केस दर्ज....|....ईद मनाने निकले लेकिन...:सहारा रेगिस्तान में फंस गया ट्रक, 49 लोगों की तड़प-तड़प कर मौत....|....महागठबंधन में दरार! झामुमो ने बदली रणनीति, अब राज्यसभा की दोनों सीटों पर उतारेगी अपने उम्मीदवार....|....इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट: स्वास्थ्य मंत्री बोले- क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण....|....पंजाब में भीषण सड़क हादसा: ट्रॉला और पिकअप में जबरदस्त टक्कर, डेरा ब्यास जा रहे आठ श्रद्धालुओं की मौत....|....35 सेकंड में युवती का कत्ल: ऑफिस में युवक ने किए 30 वार, एकतरफा प्यार और हत्या में परिवार के दावे से नया मोड़....|....'कूटनीति से ही समाधान संभव': यूएन से सम्मानित मेजर अभिलाषा का शांति संदेश, लेबनान के पुनर्निर्माण की बताई जरूरत....|....राष्ट्रीय स्तर पर 3% गिरावट के बीच यूपी का शानदार प्रदर्शन, जीएसटी संग्रह में 13% बढ़ोतरी, देश में नंबर वन....|....सुरक्षा कटौती पर बिहार में रार: पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने आवास से सुरक्षाकर्मियों को लौटाया; अपमान का लगाया आरोप